अचानक बाढ़ सी आ गई पूर्व आतंकियों की जो जाना चाहतें हज. सरकार भी सोच रही ऐसा क्यों जब कि आतंक का नहीं होता कोई मजहब..


जिन आतंकियों के सफाए के लिए आज पूरी दुनिया एक मंच पर खड़ा होना चाहती है, उन्ही आतंकियों को बचाने और उन्हें प्रोत्साहन देने वालों की भी यहाँ कमी नहीं है. सालों से भारत आतंवाद की मार झेल रहा है, जिनमे अपने ही देश के आतंकि विचारधारा वाले लोग शामिल है. कश्मीरी आतंकियों के लिए आज भी वहां के नेता पनाहगाह बने हुए है और उन्हें अनेक प्रकार से प्रोत्साहन देने की कोशिश अभी भी जारी है.

जिन्होंने कश्मीर को जह्ह्नुम बना दिया उन्ही के लिए इतनी मोहब्बत समझ से परे है. जम्मू कश्मीर की सबसे पुरानी पार्टी नेशनल कांफ्रेंस के नेता हमेशा आतंकियों के हित की बातें करने के लिए जाने जाते रहे है. कश्मीर के मुद्दे पर पाकिस्तान का समर्थन करते हुए अक्सर नेकां के नेताओं को देखा जाता है. यहाँ तक की कितनी बार पार्टी के वरिष्ठ नेता फारूक अब्दुल्ला को भी बेबुनियाद बयानबाजी करते देखा गया है.

दरअसल नेकां विधायक शमीम फिरदौस ने आतंकियों की सिफारिश करते हुए मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती से सवाल किया था कि क्या आतंकियों को भी हज पर जाने का मौका दिया जा सकता है. महबूबा ने उनके मन की बात को समझते हुए शनिवार को विधानसभा में कहा कि पूर्व आतंकियों को हज पर जाने के लिए पासपोर्ट पूरी जांच के बाद ही दिया जाता है. उनकी गतिविधियों की जांच के बाद पासपोर्ट की अनुमति दी जाती है.

उन्होंने बताया कि यदि कोई आवेदक जो हथियारों की ट्रेनिंग के लिए पीओके या पाकिस्तान गया था और लौट आया है और अब वह किसी देश विरोधी गतिविधि में शामिल नहीं हुआ है तो उसके आवेदन पर विचार किया जा सकता है. इसके लिए उसे लौटने के बाद से 15 साल की अवधि को पूरा करना होगा. 


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