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गले मत मिलो क्योंकि हमारे हुजूर के गले मिलने का सबूत नहीं- देवबंद

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर के देवबंद स्थित इस्लामिक शिक्षण संस्थान(जो अक्सर फतवे जारी करता है) ने एक नया अजीबोगरीब फतवा जारी करते हुए ईद के बाद गले मिलने को ही बिदअत करार दिया है. देवबंद के मौलानाओं का मानना है कि मुस्लिमों को ईद के बाद गले नहीं मिलना चाहिए. देवबंद के इस फतवे में कहा गया है कि ईद के त्योहार के दौरान एक-दूसरे से गले मिलना इस्लाम की नजर में अच्छा नहीं है क्योंकि हमारे हुजूर के गले मिलने का कोई सबूत नहीं है. दारुल उलूम के फतवे का उलेमा ने भी समर्थन किया है.

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बता दें कि पाकिस्तान के एक व्यक्ति ने दारुल उलूम से लिखित में सवाल पूछा था कि क्या ईद के दिन गले मिलना मोहम्मद साहब के अमल (जीवन में किए गए कार्यों) से साबित है. अगर हमसे कोई गले मिलने के लिए आगे बढ़े तो क्या उससे गले मिल लेना चाहिए. सवालों के जवाब में दारुल उलूम के मुफ्तियों की खंडपीठ ने दिए फतवे में स्पष्ट कहा कि खास ईद के दिन एक दूसरे से गले मिलना मोहम्मद साहब और सहाबा किराम से साबित नहीं है. इसलिए बाकायदा ईद के दिन गले मिलने का एहतेमाम करना बिदअत (मोहम्मद साहब के जीवन से हटकर) है.

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फतवे में देवबंद ने आगे कहा है कि गर किसी से बहुत दिनों बाद इसी दिन मुलाकात हुई हो तो फितरतन मोहब्बत में उससे गले मिलने में कोई हर्ज नहीं है. बशर्ते यह कि ईद के दिन गले मिलने को मसनून (सुन्नत) या जरूरी न समझा जाता हो. अगर कोई गले मिलने के लिए आगे बढ़े तो उसे प्यार से मना कर दिया जाए, लेकिन इस बात का खास ख्याल रखा जाए कि लड़ाई झगड़े या फितने की शक्ल पैदा नहीं होनी चाहिए.

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