लो, आ गया नुसरत जहाँ को इस्लाम से खारिज करने का फरमान.. अरब से नहीं बल्कि भारत से

जिस बात की आशंका जताई जा रही थी, ठीक वैसा ही हुआ है. लेकिन अफ़सोस इस बात का है कि इसके बाद भी वो कथित बुद्धिजीवी तथा खान मार्केट गैंग के सदस्य मौन हैं जो खुद को लोकतान्त्रिक हितों का पैरोकार बताते हैं, अभिव्यक्ति की आजादी की बात करते हैं. पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में इस्कॉन रथयात्रा के दौरान टीएमसी सांसद नुसरत जहाँ द्वारा आरती किये जाने के बाद उनको इस्लाम से खारिज करने का फतवा जारी कर दिया है. ये फतवा अरब से नहीं बल्कि उस भारत से आया है, जिसे सेक्यूलर कहा जाता है.

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बिजनिसमैन निखिल जैन से हाल ही शादी करने वालीं टीएमसी सांसद नुसरत जहाँ के खिलाफ ये फतवा बरेलवी उलेमा ने जारी किया है. नुसरत जहाँ द्वारा मंदिर में आरती किये जाने के बाद बरेलवी उलेमा भड़क उठे हैं तथा उन्हें इस्लाम से खारिज करने का फरमान सूना दिया है. बरेलवी उलेमा ने कहा है कि मजहबे इस्लाम के दायरे को जो भी पार करता है वो इस्लाम से खारिज हो जाता है तथा नुसरत जहां ने ऐसी गुस्ताखी की है. उलेमा ने कहा कि ऐसे लोग सियासत के लिए मजहब को बदनाम करते हैं.

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मुफ्ती मुहम्मद गुलाम रजवी ने कहा कि इस्लाम में औरतों को उनके अधिकार दिए हैं. सियासत करना अलग है लेकिन गैर शरई काम करना इस्लाम के खिलाफ है. जो भी शख्स मजहबे इस्लाम का दायरा पार करता है वो खुद बे खुद इस्लाम से खारिज हो जाता है. नुसरत जहां ने भी ऐसा ही किया है. अगर उन्हें फिर से इस्लाम धर्म में आना है तो तौबा करनी होगी. मुफ्ती सय्यद कफील अहमद हाशमी ने कहा कि आरती करना इस्लाम में मना है. इस तरह के काम करना शरीयत के खिलाफ माना जाता है. सियासत के लिए मजहब को बदनाम करना ठीक नहीं है. शरीयत कानून में इसकी सख्त मनाई है. नुसरत जहां ने गैर शरई काम किया है तथा वह इस्लाम से खारिज हो चुकी हैं.

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