सचिन और गौरव की आत्मा को मिला होगा संतोष .. अब मांग हो रही फांसी की

एक लम्बा इन्तजार, न सिर्फ एक घर का बल्कि एक पूरे परिवार का और पूरे राज्य के साथ देश का भी . अपनी बहन की रक्षा के लिए गये डॉ भाइयो को मार डाला गया और वहीँ से बन गयी थी उस दंगे की पटकथा जहाँ से आख़िरकार भारत की फ़ौज को आना पड़ा था . इतना ही नहीं , स्थानीय पुलिस पर आजम खान के दबाव की भी बात सामने आई थी और देखते ही देखते आधा प्रदेश उबल पड़ा था अखिलेश यादव के शासन काल में .

यहाँ बात चल रही है मुज़फ्फरनगर दंगे की . भले ही वहां पर दंगा चलने के कारण घर छोड़ कर भागे लोगों की कहानी बार बार दिखाई गयी रही हो पर सचिन और गौरव की आत्मा को आज काफी हद तक संतोष मिला होगा . इतना ही नहीं , अभी 8 फ़रवरी का भी इंतजार है जिसके लिए एक बड़ा वर्ग मांग रहा है उन दरिंदो के लिए फांसी की सज़ा जिनके चलते न सिर्फ एक ही माँ के ये २ लाल बलिदान हो गये थे बल्कि कई अन्य घर भी उजड़ गये थे .

ज्ञात हो कि मुजफ्फरनगर जिले में हुए कवाल कांड में मलिकपुरा के ममेरे भाइयों सचिन और गौरव की हत्या के केस में कोर्ट ने बुधवार को सभी सातों आरोपियों को दोषी करार दे दिया। एडीजे हिमांशु भटनागर की अदालत में 8 फरवरी को सभी दोषियों को सजा सुनाई जाएगी। करीब साढ़े पांच साल पहले 27 अगस्त 2013 को जानसठ कोतवाली क्षेत्र के गांव कवाल में यह दोहरा हत्याकांड हुआ था। जिसके बाद मुजफ्फरनगर के शामली में दंगा भड़क उठा था। मामले में सात लोग आरोपी हैं, जिन्हें दोषी करार दिए जाने के बाद हिरासत में ले लिया गया। 27 अगस्त 2013 को कवाल गांव में युवती से छेड़छाड़ का विरोध करने पर युवती के भाइयों गौरव व सचिन की कर दी गई थी। इस निर्मम हत्या के बाद मुज़फ्फरनगर में साम्प्रदायिक दंगा भड़क उठा था जिसमें कई लोगों की मौत हुई थी।

27 अगस्त 2013- इस तारीख के बाद जिले का अमन-चैन गायब हो गया था। इसके बाद पंचायतों का दौर चला और एकाएक जनपद दंगे की चपेट में आ गया। बुधवार को सचिन और गौरव की हत्या के इस बहुचर्चित मामले में अदालत के निर्णय पर सभी की निगाहें टिकी रहीं। कवाल गांव के उस चौराहे पर आज सन्नाटा है। इसी चौराहे पर दोनों युवकों की पीट-पीटकर हत्या की गई थी। जिले में हिंसा भड़क उठी। बता दें कि कवाल के दोहरे हत्याकांड के बाद जिले का सांप्रदायिक माहौल बिगड़ गया था। मुजफ्फरनगर और शामली में हुई हिंसा में 65 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी। दंगे के कारण 50 हजार से ज्यादा लोग बेघर हो गए थे। न्यायालय के इस फैसले का हर तरफ स्वागत हो रहा है और उन्मादियो को फांसी की सज़ा मांगी जा रही है .

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