वामपंथी अग्निवेश का शायद पहला ऐसा बयान जिस पर हिन्दू संगठन हुए खुश.. बोले – “पूरी तरह सहमत’

खुद से खुद के नाम में स्वामी लगाने वाले और भगवा वस्त्र पहने कर हिन्दुओं के धर्मगुरु दिखाने की कोशिश करने वाले अग्निवेश आये दिन अपने बयानों से हिन्दू संगठनो के विरोध का शिकार हुआ करते थे .. कभी कभी ये विरोध हिंसक भी हो जाता था जैसा कि उनके प्रवास में और अटल बिहारी वाजपेयी जी के अंतिम यात्रा के दौरान देखने को मिला था .. पर शायद पहली बार अग्निवेश का आया है ऐसा बयान जिस पर हिन्दू समूह एक स्वर में सहमत हुए हैं और उन्हें उसके लिए धन्यवाद भी कहा है .

विदित हो कि श्रीलंका में हुए इस्लामिक आतंकी हमले के बाद देश की आंतरिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सुदर्शन न्यूज के प्रधान सम्पादक श्री सुरेश चव्हाणके जी ने लगातार बिंदास बोल कार्यक्रम के माध्यम से आह्वान किया था कि जिस प्रकार श्रीलंका सरकार ने बुरका बैन किया है उसी प्रकार से भारत में भी बैन किया जाय क्योकि ये मुद्दा राष्ट्रीय सुरक्षा का है . सुरेश चव्हाणके जी ने इसके कई प्रमाण भी दिए थे जब बुर्के की आड़ में आतंकी या अपराधिक घटना हुई थी .

उसी मुहिम को शिवसेना ने आगे बढाते हुए कहा था कि भारत में बुर्का राष्ट्रीय सुरक्षा के हितो को ध्यान में रखते हुए बैन होना चाहिए . शिवसेना के इस बयान को व्यापक जनसमर्थन मिला था . लेकिन इन सबके बीच में अग्निवेश का बयान ऐसा आया जिसकी कल्पना न तो हिन्दुओं ने की थी और न ही मुसलमानों ने भी . अग्निवेश ने तो सीधे सीधे बुरका पहने औरतों को देख कर डर जाने की बात कही और भारत ही नहीं इसको विश्व के हर कोने में बैन करने की मांग कर डाली है . यद्दपि अपने इस बयान में उन्होंने एकाध बार घूँघट का भी जिक्र किया लेकिन डर जाने की बात उन्होंने बुरका पहने औरतों के बारे में ही कहीं .

अपने बयान में अग्निवेश ने कहा कि बुर्के में कोई ऐसा लगता है कि जैसे कोई जंतु हो. अजीब सा लगता है और डर लगता है. भारत में ही नहीं, पूरी दुनिया में इसपर प्रतिबंध के लिए मुस्लिम महिलाओं को आगे आना चाहिए. कम से कम श्रीलंका की घटना के बाद एक सुधार तो होना चाहिए.” ध्यान देने योग्य है कि ईस्‍टर बम धमाकों के बाद श्रीलंका में चेहरा ढंकने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है. इसके बाद भारत में भी कुछ हिस्‍सों से ऐसी मांग उठी थी. अग्निवेश को वामपंथी  विचारधारा का माना  जाता है .

Share This Post