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कभी इशरत को बेटी बताने वाले नीतीश कुमार के सबसे मुखर विरोध में कोई खड़ा है तो वो हैं गिरिराज सिंह.. आखिर क्या हो सकता है आगे ?

सुशासन बाबू के नाम से मशहूर बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार संभवतः पहली बार सियासी भंवर में इस तरह से फंसे हुए है, जिससे निकलना उनके लिए नामुमकिन सा होता जा रहा है. एक समय आतंकी इशरत जहाँ को बेटी बचाने वाले नीतीश कुमार को चुनौती दे रहे हैं भारतीय जनता पार्टी के फायरब्रांड हिन्दू राष्ट्रवादी नेता तथा केन्द्रीय मंत्री गिरिराज सिंह. गिरिराज सिंह लगातार नीतीश कुमार पर निशाना साध रहे हैं. पिछले 1 साल से देखा जाए तो बिहार में कुछ ऐसी घटनाएँ हुई है, जिसने नीतीश कुमार की सुशासन बाबू की छबि को काफी हद तक कमजोर किया है, जिससे बिहार की जनता नए नायक की तलाश कर रही है.

बिहार की जनता के इसी जनाए नायक के तौर पर उभर रहे हैं गिरिराज सिंह. कभी इशरत जहाँ को बेटी बताने वाले नीतीश कुमार के सबसे मुखर विरोधी के रूप में कोई नाम सामने है तो वो हैं गिरिराज सिंह. केन्द्रीय मंत्री गिरिराज सिंह को नीतीश पर हमले की खुली छूट मिली हुई है. बाढ़ को लेकर नीतीश बैकफुट पर हैं तथा नीतीश पर गिरिराज का हमला रोज-ब-रोज तेज हो रहा है. इस सब पर मोदी और शाह आंख- कान बंद किये हुए हैं. सवाल खड़े हो रहे हैं कि क्या यह सब जानबूझ यह सब किया जा रहा है ? बिना किसी आशीर्वाद के गिरिरराज ऐसा बिल्कुल नहीं कर सकते. तो क्या भाजपा गिरिराज को बिहार में एंटी नीतीश फेस के रूप में खड़ा करने वाली है ?

गिरिराज सिंह पिछले कई साल से बिहार में नीतीश के खिलाफ फील्डिंग कर रहे हैं. लेकिन नीतीश को ललकारने की छूट गिरिराज को अब मिली है. उन्होंने नीतीश को दो टूक कह दिया है कि बिहार में उनकी नहीं बल्कि दो दलों की सरकार है. अगर कुछ गलत होगा तो जरूर बोलेंगे, कोई रोक नहीं सकता. नीतीश से इस अंदाज में आज तक भाजपा के किसी नेता ने बात नहीं की थी. लेकिन अब गिरिराज सिंह ने नीतीश कुमार के खिलाफ टाल ठोंक दी है. गिरिराज सिंह नीतीश कुमार के खिलाफ तनकर खड़े हो गये हैं. इससे सबसे बड़ा सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या 2020 बिहार विधानसभा चुनाव में भाजपा गिरिराज पर कोई बड़ा दांव खेलने वाली है?

गिरिराज सिंह की छवि एक ऐसे नेता की बन रही है जो ताल ठोक कर व्यवस्था की खामियों को उजागर करता है. सरकार किसी को हो, बखिया उधेड़ने में उन्हें देर नहीं लगती. अपनी हो, परायी हो, गिरिराज सिंह सबकी खबर लेते हैं, जमकर लेते हैं. तो क्या सोची समझी नीति के तहत गिरिराज की ऐसी छवि को उभारा जा रहा है ? हाल के दिनों में उनकी लोकप्रियता ऐसी बढ़ी है कि अब राजद भी उनका मुरीद हो गया है. जो गिरिराज राजद को फूटी आंख नहीं सुहाते थे, अब वही उसके लिए सच बोलने वाले नेता हो गये हैं.

बीजेपी के मुखर विरोधी लालू यादव की पार्टी राजद के उपाध्यक्ष और वरिष्ठ नेता रघुवंश प्रसाद सिंह ने गिरिराज सिंह की तहे दिल से तारीफ की है. ऐसा हो भी क्यों नहीं. जो काम राजद न कर सका वो अकेले गिरिराज कर रहे हैं. विपक्ष के सबसे बड़े नेता तेजस्वी ने राजद को निर्बल और लाचार बना दिया है. इसके बाद अब तो राजद को गिरिराज में ही ‘नेता’ की छवि दिखने लगी है. सत्ता में साझीदार होते हुए भी गिरिराज सिंह, नीतीश के खिलाफ विपक्ष की भूमिका में हैं. बाढ़ से निबटने में बिहार सरकार की नाकामी पर गिरिराज सिंह आग उगल रहे हैं. इससे जनता को लग रहा है कि कोई नेता तो है जो उसके हक के लिए सरकार से लड़ रहा है तथा गिरिराज सिंह जनता के नायक बनकर सामने आ रहे हैं.

गिरिराज सिंह ने जदयू से सवाल पूछा है कि आखिर उन्हें क्यों गाली दी रही है ? क्या बाढ़ के लिए जो अफसर दोषी हैं उन पर कार्रवाई नहीं होनी चाहिए ? बाढ़ में फंसे लोगों का गुस्सा चरम पर है. वे सांसद, विधायक को देखते हैं तो गाली देने लगते हैं। मारने के लिए दौड़ते हैं। अफसरों को लोगों के दुख-तकलीफ से कोई मतलब नहीं है. मैं जनप्रतिनिधि होने के नाते अगर उनकी बात सरकार तक नहीं पहुंचाऊंगा तो ये काम कौन करेगा ? मुझे भी मालूम है बिहार में एनडीए की सरकार है. लेकिन जब जनता के दुख-दर्द में सरकार काम न आये तो आवाज उठानी पड़ती है। मैंने अपना काम किया तो जदयू के लोग मुझे गाली दे रहे हैं. मुझे तो गाली खाने की आदत हो गयी है, लेकिन भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बताएं कि मुझे क्यों गाली दी जा रही है.

यानी अब गिरिराज, बिहार भाजपा के नीतीश मोह को झकझोरना चाहते हैं. अब उन्होंने अपनी लड़ाई भाजपा के चौखट तक पहुंचा दी है. इससे साफ़ है कि गिरिराज अब रुकने वाले नहीं है. गिरिराज सिंह ने हाल ही में कहा था कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उनकी आधी इच्छा(धारा 370) पूरी कर दी है, अगर बची हुई इच्छा(अयोध्या श्रीराम मंदिर) पूरी हो जाए तो राजनीति से संन्यास ले लेंगे. लेकिन साथ ही ये भी कहा था कि पार्टी जो भी कानंप सौंपेगी व करते रहेंगे. गिरिराज के समर्थक को अगले मुख्यमंत्री के तौर पर देख रहे हैं. सोशल मीडिया पर “बिहार में जय गिरिराज” का नारा चलने लगा है.

सवाल ये है कि क्या गिरिराज सिंह बिहार में 2020 चुनावों में सीएम पद के भावी उम्मीदवार हो सकते है ? पिछले 15 साल से बिहार में कोई ऐसा नेता नहीं उभर सका जो नीतीश को टक्कर दे सके या नीतीश का विकल्प बन सके. लालू यादव के राजनीति से बेदखल होने के बाद नीतीश अकेले महायोद्धा रह गये हैं. बिहार भाजपा में सुशील मोदी बड़े नेता हैं. जुझारू भी हैं. उनकी काबिलियत में कोई कमी नहीं है. लेकिन वह नीतीश के करीबी हैं, अतिशय नीतीश प्रेम उनकी राह का रोड़ है. भाजपा को एंटी नीतीश फेस चाहिए जो ठोक-बजा कर काम करे तथा यही काम नीतीश कुमार कर रहे हैं.

केन्द्रीय मंत्री गिरिराज बेशक नीतीश की तरह जहीन और सुलझे हुए नेता नहीं हैं लेकिन इस समय उनकी लोकप्रियता चरम पर है. लालू यादव की देशज शैली कभी नीतीश पर भारी पड़ती थी. गिरिराज भी ठेठ अंदाज में वही बोलते हैं जो न सिर्फ भाजपा के समर्थकों को पसंद है बल्कि आम जनता को भी पसंद है. गिरिराज सिंह का बेख़ौफ़ तथा बेबाक देशी अंदाज  लोगों को भा रहा है. बिहार के लोग इस बात को स्वीकारने लगे हैं कि गिरिराज सिंह उनके नेता हो सकते हैं जो बिहार की गद्दी संभाल सकते हैं. बीजेपी भी इस बात को समझ चुकी है कि  नीतीश कुमार की अकड़ को गिरिराज सिंह ने ढीला कर दिया है. अब गिरिराज 2020 में बिहार में सीएम फेस होंगे या नहीं, ये तो आगे जाकर ही पता चलेगा लेकिन फिलहाल तो गिरिराज सिंह ने नीतीश कुमार की नींद उड़ा रखी है.

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