दलित की बेटियों का विवाह राजपूतों ने करवाया और फिर डोली को अपने कन्धो पर रख कर की विदाई


एकता और अखंडता की दुहाई राजनैतिक मंचो से और टी वी की स्क्रीनों से देने वालों के लिए शायद एकता की बातें केवल वर्ग विशेष से जोड़ कर ही सम्भव है .. हिन्दू समाज को जातियों में लड़ा कर न जाने किस प्रकार की एकता की दुहाई देने वालो के लिए ये खबर शायद मायने न रखती हो लेकिन हिन्दू समाज ने पेश किया है एक ऐसा उदाहरण जिसको सुनने के बाद हर कोई एक स्वर में बोल पड़ा है कि हिन्दू समाज एक था और एक ही रहेगा .. एक सुखद खबर जिसने खींचा सबका ध्यान अपनी तरफ .

हिन्दू समाज के साथ देश की एकता और अखंडता को बनाये और बचाए रखने के लिए चिंतित और प्रयासरत हर राष्ट्रवादी के चेहरे पर मुस्कान लाने वाली ये खबर है राजस्थान के पाली जिले से . यहाँ के गाँव धनला ने उस समय सबका ध्यान तक खींच लिया जब राजपूतों ने आर्थिक रूप से कमजोर दलित परिवार की 2 बेटियों का ब्याह अपने खुद के सामर्थ्य से करवाया . इस सामाजिक एकता के प्रतीक रहे उसी गांव के कुशालसिंह जी जिन्होंने मेघवाल समाज की दो बेटियों की शादी का पूरा खर्च उठाया.

आरएमजीबी में अस्थाई संदेशवाहक (मैसेंजर) की नौकरी करने वाले चम्पालाल मेघवाल की बड़ी बेटी मनीषा तथा छोटी बेटी संगीता की शादी थी. जिसका आयोजन बीती रात गांव में मुख्य बस स्टैण्ड के पास बेरा ढीमड़ी फार्म हाऊस स्थित भवन प्रेमकुंज में किया गया. इतना ही नहीं कुशल सिंह के साथ इस विवाह में बरातियो का आतिथ्य की पूरी जिम्मेदारी उस गाँव के राजपूतों ने उठाई . अपनी ससुराल जा रही बेटियों के साथ हर कोई उस समय भाव विह्वल हो गया जब राजपूतों ने बेटियों की डोली को अपने कन्धो पर रखा और उनकी ससुराल की तरफ चल दिए थे . राजपूत समाज के इस कार्य की हर तरह खुल कर प्रसंशा हो रही है .


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