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पुलिस की चिंता करने वाले पहले गृहमंत्री बने अमित शाह.. बोले – “ये वो बल है जिसके 34 हजार जवानो ने देश के लिए बलिदान किया, बदला जायेगा इसका ढांचा”

कभी समय हुआ करता था जब राजनीती को चलाने का आधार केवल पुलिस बल हुआ करता था . राष्ट्र की आतंरिक सुरक्षा की रीढ़ इस पुलिस बल को अपने राजनैतिक फायदे के लिए तमाम सत्ताधीशो ने प्रयोग या दुरूपयोग किया लेकिन कभी भी इस पर नजर डालने की जरूरत नहीं समझी कि पुलिस का जवान तेजी से बदल रहे हालात में सन 1861 के कानून पर ही नौकरी कर रहा है .. न ही उसके काम के घंटो की गिनती होती थी और न ही उसको मिलने वाली पीड़ा का किसी को भी एहसास ..

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लेकिन सम्भवत: स्वतंत्र भारत के पहले गृहमंत्री हैं अमित शाह जी जिन्होंने बेहद कम संसाधन में और कम संख्या बल में भी समाज को सुरक्षा दे रहे इस बल की पीड़ा को समझा है और उनके लिए उम्मीद की एक किरण दिखाई है जिस से अब देश के लाखों पुलिसकर्मी उम्मीद जगा चुके हैं . कुछ रिटायर्ड पुलिस अधिकारियो का भी कहना है कि अगर कोई पुलिस के सामने खड़े विषम हालातो को समझ सकता है तो वो मोदी सरकार और उसके गृहमंत्री अमित शाह ही हैं .

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इस से पहले संसद में भी केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने पुलिस की पीड़ा को जताते हुए कहा था कि साहब पुलिस को बदनाम करना बहुत आसान है लेकिन उसके कार्यों को नजरंदाज नहीं करना चाहिए .. अब बेहद कम समय में दूसरी बार पुलिस के लिए बयान देने के बाद ये माना जा रहा है कि जल्द ही पुलिस सुधारों की लम्बी मांगो पर सकरात्मक कदम उठेंगे..  केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने ये बात ब्‍यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट (BPR&D) के कार्यक्रम में कही ..

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अमित शाह ने कहा कि “क्रिमिनल और क्रिमिनल माइंडेड लोगों से पुलिस चार कदम आगे रहनी चाहिए. ये तभी हो सकता है जब मॉडर्नाइजेशन सही प्रकार से हो. अब थर्ड डिग्री का जमाना नहीं है. इंवेस्टिगेशन के लिए हमें साइंटिफिक तरीकों को अपनाना होगा.” उन्‍होंने कहा कि देश में ‘केन्द्रीय पुलिस संस्थान बनाए जाने की जरूरत है.उन्‍होंने कहा कि इसकी एफीलिएटेड ब्रांच हर प्रदेश में होगी. किसी केस में दोषियों को त्वरित सजा दिलाने के लिए फोरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी और कॉलेजों को बढ़ावा देने की जरूरत है.

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उन्होंने कहा कि पुलिस के हाईटेक होने से गुनहगारों को जल्द सजा दिलाने में हमें सफलता मिलेगी और इसके बाद गुनाह करने की मानसिकता भी कम हो पाएगी.’पुलिस सुधारों पर बल देते हुए शाह ने कहा कि “पुलिस रिफॉर्म एक बहुत लंबी और निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है, चुनौतियां जैसे बदलेंगी उसी के अनुसार हमें इसे आगे बढ़ाना पड़ेगा. मगर पुलिसिंग में रिफॉर्म एक बहुत बड़ा कांसेप्ट है, जिसे BPR&D को नए सिरे से डिज़ाइन करना पड़ेगा.

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उन्होंने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो सीआरपीसी और आईपीसी के अंदर जरूरी परिवर्तन के लिए देशभर में एक कंसल्टिंग प्रक्रिया शुरु करने की जरूरत है. सबका सुझाव लेकर उसे गृह मंत्रालय में भेजा जाए, ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए. सीआरपीसी और आईपीसी में जरूरी बदलावों के लिए हमें आगे बढ़ने की जरूरत है.”.. अमित शाह जी ने कहा कि  पृथ्वी पर जबसे राज्य नाम की संस्‍था अस्तित्व में आई, तो उसका सबसे पहले शुरू होने वाला उपांग था लॉ एंड ऑर्डर.

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उन्होंने कहा कि जिस प्रकार से मोदी जी भारत के निर्माण को नये रूप में करना चाह रहे हैं उसके लिए आंतरिक सुरक्षा का मजबूत होना बेहद जरूर है और वो तब ही हो सकती है जब एक तेजतर्रार हईटेक पुलिस बल तैयार हो..उन्‍होंने आगे कहा, “देश की आंतरिक सुरक्षा को बनाए रखने के लिए अब तक करीब 34 हजार से ज्यादा पुलिस के जवानों ने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया है, ..  उन्होंने पहली बार पुलिस की स्थापना लोगों के अधिकारों की रक्षा, लोगों की सेवा और मानवाधिकारों के संरक्षण के लिए की. पुलिस और लॉ एंड ऑर्डर राज्य का विषय है. परन्तु ये जरुरी नहीं है कि हर वक़्त मोटिवेट करने वाली लीडरशिप हर राज्य की पुलिस को प्राप्त हो.”

 

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