असम और अरूणाचल में हटेगा अफ्सपा क्योंकि वहां के लोग केवल असंतुष्ट थे, गद्दार नहीं

केन्द्र सरकार ने असम और अरूणाचल प्रदेश से अफ्सपा कानून को हटाने का मन बना लिया है। गौरतलब है कि असम और अरूणाचल प्रदेश के कई इलाके में सुरक्षाबलों के सुविधा को ध्यान में रखते हुए 27 साल पहले इस कानून को लागू किया गया था। बता दें कि सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून, 1958 लागू होने के बाद से ही सरकार और कानून के विरोधी अपने-अपने तरिके से इसका विरोध कर रहे हैं।
ज्ञात हो कि भारत सरकार ने एक रिपोर्ट में बताया है कि वर्ष 2005 से लेकर वर्ष 2012 तक पूर्वोत्तर के जिन इलाकों में यह कानून लागू किया गया है, उन इलाकों में अबतक लगभग 9468 आतंकी घटनाएं हो चुकी हैं। इनमें करीब 26,301 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड द्वारा कथित तौर पर सुरक्षा बलों की हत्या और लूटपाट के मामले सामने आने के बाद अफ्सपा लागू किया गया था। असम और अरुणाचल प्रदेश के अलावा ऐसे कई और राज्य भी है जहाँ पर अफ्सपा कानून लागू है।
बता दें कि मणिपुर, नागालैंड, मेघालय और जम्मू कश्मीर में भी अफ्सपा कानून लागू है। गौरतलब है कि कानून के विरोधी और कई संगठन लगातार असम और अरूणांनचल प्रदेश में आफ्सपा कानून से परेशान लोग आये दिन इस कानून को हटाने की मांग कर रहे है। मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि अफ्सपा कानून को दो राज्यों से हटाने के लिए मंत्रालय ने दोनों प्रदेशों की रिपोर्ट मांगी है। असम और अरुणाचल प्रदेश को छोड़कर अन्य राज्यों में यह कानून पहले की तरह ही लागू रहेगा। 
हलांकि, वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक सुरक्षाबलों ने इलाकों में सक्रिय उग्र समूहों को शांत कर दिया है। गृहमंत्री के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सुरक्षाबलों ने इन इलाकों में सक्रिय उग्र समूहों को शांत कर दिया है, लेकिन केंद्र सरकार अपनी तरफ से इन मामलो पर पूरी तरह संतुष्ट हो जाने के बाद कोई फैसला लेगी। इसके लिए सरकार ने इन क्षेत्रों से वरिष्ट अधिकारियो से हर तीसरे महीने की रिपोर्ट मांगी है। पहले हर 6 महीने पर अफस्पा की रिपोर्ट भेजी जाती थी।
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