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मजहबी चरमपंथ के खिलाफ मोदी सरकार ने जाहिर किये अपने इरादे. उसी का परिणाम है आतंकी समूह सिमी पर आया ये फैसला

आतंकियों के खिलाफ जहाँ कश्मीर में भारत की फ़ौज को खुली छूट मिली हुई है तो वहीँ देश के अन्य हिस्सों में भी मजहबी चरमपंथ और साम्प्रदायिक उन्माद के साथ साथ आतंकी हरकतों को करने वालों के खिलाफ मोदी सरकार ने कड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं . जिन सिमी आतंकियों के लिए कभी मध्य प्रदेश में विपक्ष ने शिवराज सरकार पर हल्ला बोला था उसी सिमी के खिलाफ अब केंद्र सरकार ने भी अपना रुख साफ़ कर दिया है .

ज्ञात हो कि मोदी सरकार ने राष्ट्रहित और राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए भारत देश में विभिन्न आतंकवादी वारदात में कथित तौर पर शामिल स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) को सरकार ने पांच और साल के लिए प्रतिबंधित कर दिया है क्योंकि यह लगातार विध्वंसक गतिविधियों में शामिल है. मोदी सरकार को किसी भी रूप में इस आतंकी संगठन को किसी भी रूप की छूट देने लायक कोई हरकत नहीं दिखी .  राष्ट्र हित के इस अतिमहत्वपूर्ण मुद्दे पर भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने कहा कि संगठन सांप्रदायिक वैमनस्य पैदा करके, देश की अखंडता और सुरक्षा को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों के जरिये लोगों के दिमाग को दूषित कर रहा है.

भारत सरकार के गृह मंत्रालय के द्वारा जारी किये गये एक अतिमहत्वपूर्ण नोटिफिकेशन के अनुसार, अगर सिमी की गैरकानूनी गतिविधियों पर अंकुश नहीं लगाया गया और इसे तुरंत नियंत्रित नहीं किया गया तो यह अपनी विध्वंसक गतिविधियों को जारी रखेगी, अपने फरार कार्यकर्ताओं को फिर से संगठित करेगी तथा देश विरोधी भावनाओं को भड़का कर धर्मनिरपेक्ष ढांचे को बाधित करेगी. अधिसूचना में कहा गया है, “अब, इसलिए, गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967 की धारा 3 की उप-धारायें (1) और (3) के तहत प्रदत्त शक्तियों का इस्तेमाल कर केंद्र सरकार ने सिमी को ‘गैर-कानूनी संगठन’ घोषित किया है और यह अधिसूचना उपरोक्त अधिनियम की धारा 4 के तहत किए जा सकने वाले किसी भी आदेश के अधीन है, जिसका प्रभाव पांच साल की अवधि के लिए होता है.”

 

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