शहंशाह अली था काले धन का कारोबारी. जानिये क्या क्या गुनाह है उसके माथे पर धब्बे की तरह

भारत के सबसे बड़े टैक्स चोर, विदेशी बैंकों में कथित तौर पर काला धन रखने और हवाला का आरोपी पुणे के एक घुड़साल के मालिक हसन अली खान से सीबीआइ ने नए सिरे पूछताछ शुरू कर दी है। हसन अली पर हजारों करोड़ रुपये का कालाधन विदेशी बैंकों में जमा करने और जांच अधिकारियों को रिश्वत देकर इससे बच निकलने का आरोप है। इस मामले की जांच में सीबीआइ और ईडी दोनों जुटे हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) का दावा है कि इस शख्स ने 2001 से 2008 के बीच सिर्फ सात साल में एक लाख दस हजार करोड़ रुपए से ज्यादा की काली कमाई जमा की।
हसन अली खान का जन्म 1953 में हैदराबाद में हुआ। पिता एक्साइज अफसर थे। हसन की पढ़ाई-लिखाई हैदराबाद में ही हुई। 70 के दशक में अली के परिवार की आर्थिक हालत काफी खस्ता थी। तब उसने हैदराबाद में कार रेंटल एजेंसी शुरू की और साथ ही शुरू किया धोखाधड़ी और हवाला का कारोबार। हसन ने अपना पहला विदेशी खाता यूबीएस की सिंगापुर ब्रांच में 1982 में खोला और उसमें 15 लाख डॉलर यानी करीब साढ़े सात करोड़ रुपए जमा कराए गए। कुछ वक्त बाद इस खाते में तीस करोड़ डॉलर यानी करीब 1500 करोड़ रुपए जमा कराए गए। आरोप है कि ये रकम हथियार तस्कर अदनान खगोशी के न्यूयॉर्क के खाते से जमा कराए गए थे।
हसन अली के इस खाते में पैसों का लेनदेन चलता रहा। 2006 में उसके इस खाते में 80 करोड़ डॉलर यानी करीब 4000 करोड़ रुपए जमा थे। हवाला का धंधा पर्दे की आड़ में छिपा रहे इसके लिए हसन अली ने कई धंधों में हाथ आजमाया। 90 के दशक के शुरुआती दौर में उसने प्रॉपर्टी डीलिंग का काम शुरू और साथ ही हैदराबाद में होने वाली घुड़दौड़ में किस्मत आजमान शुरू किया।
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