गुरमीत के निर्णय पर अदालत की जय जयकार कर रहे वो तमाम, क्या गुजरात दंगो में टूटी मस्जिदों पर अदालत के ही आये फैसले पर भी मनाएंगे जश्न?


सुप्रीम कोर्ट ने 20 साल की सजा सुनाई है गुरमीत को और पूरा हिंदुस्तान हर्ष में है। पर क्या अब अल्पसंख्यक सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का स्वागत करेगा। क्योंकि जिस तरह से मजहबी ठेकेदार तीन तलाक़ पर कानून के फैसले के खिलाफ खड़े हो गए थे। इस फैसले के खिलाफ भी खड़े होंगे क्योंकि ये फैसला भी उनके पक्ष में नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात हाईकोर्ट के उस आदेश को खारिज कर दिया, जिसमें गोधरा दंगों के बाद वर्ष 2002 के दौरान क्षतिग्रस्त हुए धार्मिक स्थलों को दोबारा बनाने और मरम्मत के लिए राज्य सरकार को पैसों देने के लिए कहा गया था। सुप्रीम कोर्ट ने साफ़ कहा कि कर दाताओं के पैसे का गलत इस्तेमाल नहीं हो सकता।
वहीं, चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा और जस्टिस पीसी पंत की एक पीठ ने हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली गुजरात सरकार की अपील स्वीकार कर ली और हाईकोर्ट के उस फैसले को निरस्त कर दिया। अदालत हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ गुजरात सरकार की ओर से दायर याचिका की सुनवाई कर रही थी। जिस तरह से हर्ष है गुरमीत के आये फैसले का, जिस तरह से हर्ष है रामपाल के खिलाफ क्या वैसा हर्ष देखने मिलेगा अल्पसंख्यकों में वक़्त ही बताएगा ?

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