कुख्यात आतंकी जीनत उल इस्लाम की लाश ले जा रहे उन्मादियों ने फौजियों पर की भयानक पत्थरबाजी.. सेना के वाहन में आग लगाने की कोशिश..उन्मादियों में औरतें दिखीं आगे

ये वही उन्मादी हैं जिनके लिए भारत के कुछ सेकुलर प्रवित्ति के नेता मासूम बच्चे या बेचारे आदि शब्दो का इस्तेमाल किया करते हैं ..उन्हें कोई मतलब नही होता अपनी भुजाओं के दम पर देश को थामे हुए सैनिको के हालात से जब उन्हें एक साथ दो मोर्चो पर लड़ना पड़ता है जिसमें एक तरफ दुर्दांत आतंकी गोलियां बरसा रहे होते हैं तो दूसरी तरफ उन्ही आतंकियों के मददगार पत्थरबाज पत्थरो की बौछार कर रहे होते हैं..इतना ही नही ठीक उसी समय भारत की स्वघोषित सेकुलर मीडिया एक एक वर्ग के कैमरे सैनिको के ऊपर केंद्रित हुए रहते हैं जो सेना द्वारा किसी भी एक मानवीय गलती को शूट करने के लिए लगे होते हैं ..

इतने के बाद भी तमाम विभागीय जांचों से गुजर कर उस सैनिक को मानवाधिकार आयोग और कभी कभी तो सुप्रीम कोर्ट तक अपनी बेगुनाही साबित करनी पड़ती है..अब उसी प्रकार के हालात फिर से बने थे जब भारत की फौज द्वारा कम से कम 5 सालों की खोज के बाद हाथ आये मोस्ट वांटेड आतंकी जीनत उल इस्लाम को फौज ने आमने सामने चली एक लंबी लड़ाई के बाद मार गिराया था और तमाम स्वघोषित बुद्धिजीवियों व कथित मानवाधिकार वादियों के दबाव के चलते उसकी लाश को उसके घरवालों को सौंप दिया..लेकिन बात यहीं खत्म नही हुई थी ..

एक आतंकी के लिए उन गद्दार पत्थरबाजों ने जो रूप दिखाया वो देख कर निरुत्तर हो गए स्वघोषित मानवाधिकारवादी..जानकारी के अनुसार आतंकी जीनत उल इस्लाम के जनाजे में भारी भीड़ उमड़ी..भले ही आतंक का कोई धर्म नही का नारा टी वी शो में बड़ी बड़ी बातों के साथ बुलन्द होता हो पर आतंकी जीनत उल इस्लाम का अंतिम संस्कार पूरे इस्लामिक रीति रिवाज के साथ किया गया.इस मौके पर भारत विरोधी नारे लगाए गए और पहले मारे गए अन्य आतंकियों का नाम लिया गया..इतना ही नही , रास्ते मे पड़ने वाले सैनिको के ठिकानों पर भयानक पत्थरबाजी की गई ..एक सेना के वाहन को आग लगने की भी कोशिश की गई..उन्मादियों से निबटने में सैनिको को बहुत मेहनत करनी पड़ी..इस उन्माद में महिलाओं को आगे देखा गया जिसके चलते सैनिको को बहुत संभल कर कार्यवाही करने को मजबूर होना पड़ा..इन भयानक पत्थरबाजी में कुछ सैनिको के घायल होने की भी खबर है जिसका इलाज करवाया जा रहा है ..

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