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पहली बार हिंदुस्तान में दिख रहा है हिन्दू वोट बैंक. जातिवाद के ठेकेदारों का मुकाबला किसी पार्टी से नहीं हिन्दू जाति से है

जब भी चुनावों का मौसम आता है विपक्ष जातिवाद कि राजनीति पर उतारू हो जाता है और बीजेपी को घेरने लगता है और गुजरात में अल्पेश, जिग्नेश और पटेल कि तिकड़ी भी इसलिए उतारी गई जो की साफ़ तौर पर दर्शा रही थी की ये कांग्रेस कि साजिश का हिसा है और ये तीनों नेता जातिवाद की राजनीति कर के अपना राजनीतिक फायेदा साध रहे थे जिसे जनता ने सिरे से ख़ारिज कर दिया. जिस तरह से तिकड़ी अपने वर्ग करते करते कांग्रेस से मिल गई, ये बात जनता को अच्छी नहीं लगी और जनता ने वही किया जो उसे सही लगा. ]

ज्ञात हो की जैसे जैसे चुनाव के वक्त नजदीक आ रहे थे जातिवाद की राजनीति से कांग्रेस को अपना भला होता दिख रहा था. कांग्रेस जो की हमेशा से मुस्लिम तुस्टीकरण कि राजनीति करते आई है वो अपना चेहरा बदलने की कोशिश में लगी थी और इसी का नतीजा था की कांग्रेस के शीर्ष संभालने वाले राहुल गांधी मंदिर जा रहे थे और पूजा पाठ कर रहे थे. भले ही कांग्रेस ये चुनाव हार गई हो पर उसको समझ आ गया होगा की तुस्टीकरण की राजनीति का खात्मा हो गया है और केवल एक वर्ग विषय से प्यार महंगा पड़ सकता है.

आपको बता दे की जिस तरह से योगी आदित्यनाथ ने कहा था की जनता जानती है की कांग्रेस की जातिवाद और हिन्दुवों को बांटने की साजिश है और जनता इसको सिरे से नकार देगी. अब वो बात लगभग जाहिर हो गई है क्योंकि कांग्रेस को जनता ने हिमांचल और गुजरात दोनों जगह नकार दिया और दोनों जगह बीजेपी की जीत तय है.  

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