जनेऊ दिखाना हो या टेंपल रन.. कांग्रेस के सॉफ्ट हिन्दुत्व के झांसे में नहीं आई जनता.. ईसाई-मुस्लिम बहुल इलाकों में ही जगह बना सकी कांग्रेस

देश की जनता ने जो काम 2014 में किया था, उससे भी बढ़कर 2014 में किया. जनता ने बीजेपी को सत्ता सौंपी ही लेकिन उस कांग्रेस को पूरी तरह से खारिज कर दिया जो कांग्रेस खुद को देश की आजादी का कथित ठेकेदार बताती है तथा जिसने आजादी के बाद देश की सत्ता पर लगभग 60 वर्ष राज किया. 2014 में जहाँ कांग्रेस को ४४ सीटें मिली थी तो 2019 में भी मात्र 52 सीटें मिली हैं. लेकिन इसके बीच के जो निष्कर्ष हैं वो कांग्रेस के लिए बेहद ही चौंकाने वाले तथा चिंताजनक हैं.

ज्ञात हो कि 2014 की हार के बाद कांग्रेस पार्टी सॉफ्ट हिन्दुत्व की ओर लौटी. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी सहित ज्यादातर कांग्रेसी नेता मंदिर मंदिर दौड़ते हुए दिखे, यहाँ तक कि कांग्रेस की तरफ से राहुल गांधी का जनेऊ दिखाया गया, राहुल गांधी का गोत्र बताया गया, उन्हें ब्राह्मण बताया गया लेकिन देश की जनता कांग्रेस के कांग्रेस की इन चालों में नहीं आई. ये हम नहीं कह रहे बल्कि लोकसभा चुनावों में कांग्रेस की स्थिति कह रही है.

कांग्रेस ने इस बार 421 सीटों पर चुनाव लड़ा, जिसमें सिर्फ 52 सीटों पर उसे जीत मिली. 196 सीटों पर कांग्रेस दूसरे और 173 सीटों पर तीसरे या उससे भी निचले पायदान पर रही. कांग्रेस के कुल 52 सांसदों में से 60 फीसदी तो सिर्फ तीन राज्यों से ही आते हैं, जो केरल, तमिलनाडु और पंजाब हैं. यानी तीनों ही नॉन हिंदी राज्य हैं अर्थात कांग्रेस को वहां जीत मिली जहाँ कोर हिंदुत्व मजबूत नहीं है या अन्य मजहब बहुतायत में हैं. एक तरफ भाजपा 17 राज्यों में 50 फीसदी से अधिक वोट शेयर लाने में सफल रही तो वहीं कांग्रेस सिर्फ पुड्डुचेरी में ऐसा कारनामा कर पाई. यहां कांग्रेस पार्टी को 56.3 फीसदी वोट मिला.

कांग्रेस को सिर्फ सात राज्यों में ही 40 से अधिक फीसदी वोट मिला है. इनमें मेघालय (48.3), नगालैंड (48.1), लक्षद्वीप (46.9), अंडमान-निकोबार (46), गोवा (42.9), चंडीगढ़ (40.9) और पंजाब (40.1) शामिल हैं. जिस केरल में कांग्रेस ने सर्वाधिक 15 सीटें जीती हैं, वहां उसे सिर्फ 37.3 फीसदी वोट मिला है. असम में जहां पार्टी को तीन सीटें मिली हैं वहां पर 35.4 फीसदी वोट मिला. इस सबसे बड़ी बात ये है कि जिन आठ राज्यों में कांग्रेस को सम्मानजनक वोट मिला है, वहां नॉन हिंदू वोटर सबसे ज्यादा हैं अर्थात हिन्दू वोटर बाहुल्य क्षेत्र में कांग्रेस को पूरी तरह से नकार दिया गया.

मेघालय, नगालैंड में कांग्रेस को सबसे ज्यादा वोट मिला, यहां 90 फीसदी वोटर ईसाई हैं. लक्षद्वीप में करीब 95 फीसदी वोटर मुस्लिम समुदाय से हैं. गोवा की जिस सीट पर कांग्रेस जीती है वहां पर ईसाई और मुस्लिमों की संख्या ज्यादा है तो वहीं जहां बीजेपी जीती है वहां पर 76 फीसदी हिंदू आबादी है. इन्हीं राज्यों की तरह पंजाब, चंडीगढ़ और अंडमान निकोबार में भी इसी तरह का ट्रेंड दिख रहा है. गुजरात चुनाव के दौरान शुरू हुआ मंदिरों में जाने का सिलसिला इस बार लोकसभा चुनाव तक चला. फिर चाहे वह कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी हों या फिर महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा, दोनों ने ही पूरे प्रचार के दौरान मंदिर-मंदिर माथा टेका और सॉफ्ट हिंदुत्व की छवि को उजागर किया लेकिन हिन्दू वोटर कांग्रेस के इस भ्रम जाल में नहीं आये तथा कांग्रेस को खारिज कर दिया.

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