केंद्र सरकार ने सुनी देशवासियों की आवाज.. एक राज्य को आदेश- जितने भी रोहिंग्या हैं वहां, एक-एक को वापस भेजो म्यांमार

जिन आशाओं, आकांक्षाओं तथा उम्मीदों के साथ देश की जनता ने प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी को 2019 के लोकसभा चुनाव में बंपर बहुमत दिया तथा उन्हें दोबारा से देश की सत्ता सौंपी थी, पीएम मोदी ने शपथ लेने के बाद देश की उन आशाओं, आकांक्षाओं तथा उम्मीदों को पूरा करने की प्रक्रिया में अपने कदम बढ़ा दिए हैं. देश की इन्ही तमाम उम्मीदों में से एक उम्मीद थी कि मोदी सरकार बौद्धों तथा हिन्दुओं के हत्यारे रोहिंग्या आक्रान्ताओं को देश से बाहर करेगी, जिस पर केंद्र सरकार ने अमल करना शुरू कर दिया है.

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खबर के मुताबिक़, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मिजोरम सरकार को आदेश दिया है कि राज्य में जितने भी रोहिंग्या हैं, उन्हें तत्काल वापस म्यांमार भेजा जाए. केन्द्रीय गृह मंत्रालय के इस आदेश का देश ने स्वागत किया है. बताया गया है कि 54 परिवारों के करीब 220 रोहिंग्या घुसपैठिये नवंबर 2017 से मिजोरम के सुदूर दक्षिणी लॉन्गतलाई जिले के चार गांवों में रह रहे हैं. म्यांमार में बौद्धों से टकराव के बाद ये रोहिंग्या म्यांमार के अराकान (रखाइन) राज्य से यहाँ आये थे.

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प्राप्त हुई जानकारी के मुताबिक़, मिजोरम गृह विभाग के एक अधिकारी ने अपनी पहचान जाहिर नहीं करने की शर्त पर कहा कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मिजोरम सरकार से म्यांमार शरणार्थियों को जल्द से जल्द वापस भेजने को कहा है. गृह विभाग के अधिकारी ने कहा कि म्यांमार सेना और रखाइन स्थित आंतकवादी संगठन अराकान सेना के बीच नवंबर 2017 में सशस्त्र संघर्ष के दौरान म्यांमार के गांवों से 1700 से ज्यादा शरणार्थियों ने मिजोरम के दक्षिणी जिले लॉन्गतलाई जिले में प्रवेश कर लिया था.

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राज्य विधानसभा में सोमवार को एक बहस में भाग लेते हुए गृह मंत्री लालचमलियाना ने कहा कि राज्य सरकार ने जिला प्रशासन व असम राइफल्स से एक परस्पर विरोधी रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद इन शरणार्थियों की पहचान को सत्यापित करने का आदेश दिया है. मंत्री ने सदन में कहा कि इनकी पुन: पहचान की प्रक्रिया अभी जारी है और एक बार प्रक्रिया के पूरी होने के बाद शरणार्थियों को म्यांमार वापस भेज दिया जाएगा.

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