जिसके अब्बा तक के दफन में रो रो कर शामिल हुए कई सन्त महन्थ उसका बेटा बोला- नहीं छोड़ सकते बाबरी

उत्तर प्रदेश के अयोध्या से दूसरे समुदाय से बयान बाजी आ रही है कि ‘मैं राम विरोधी नहीं, लेकिन बाबरी मस्जिद हमारी’और ऐसा लगता है कि कही ना कहीं

दूसरे समुदाय के लोग भी राम लला के मंदिर बनने के पक्ष में है। अयोध्या और हिंदुत्व ने पुरे 25 साल से राम मंदिर बनने की लड़ाई लड़ रहे है । अब प्रभु श्री

राम का मदिर बनेगा और देश के सभी हिंन्दुओ के आस्था का सवाल है कि राम मंदिर बनना चाहिए। मगर राम मंदिर बनने पर कुछ राजनीती पार्टी इस पर

राजनीती कर रही है जिससे इस मामले का समय बढ़ता ही जा रहा है।

अब लगता है कि दोनों समुदाय के आपसी सहयोग और सुप्रीम कोर्ट 06 फरवरी 2018 के

फैसले के बाद राम मंदिर बनने की शुरुआत हो सकती है।

बता दें कि बाबरी मस्जिद एक्शन कमीटी के सबसे पुराने वादी हाशिम अंसारी के बेटे इक्बाल अंसारी ने बाबरी विंध्वस विवाद पर कहा कि “मैं राम विरोधी नहीं हूँ

अयोध्या में एक राम मंदिर नहीं बल्कि हजारों राम मंदिर बने, मुझे कोई शिकायत नहीं है। मेरा तो बस यही कहना है कि बाबरी मस्जिद हमारी है और इसी

अधिकार की लड़ाई कई वर्षों तक हमारे पिता लड़ते रहे और उनके निधन के बाद अब मैं लड़ रहा हूँ।

“इक़बाल ने बाबरी विंध्वस के 25 वी बरसी पर कहा कि “”मैं

राम विरोधी नहीं हूं। न ही मेरे पिताजी थे। मेरे पिता और महंत ज्ञानदास की दोस्ती कितनी मजबूत थी यह हर कोई जानते हैं कि लड़ाई सिर्फ हक की है। जिस

जगह राम लल्ला है वहां एक मस्जिद थी। हमारे पास सबूत हैं और हम वही लड़ाई लड़ रहे। ”

गौरतलब है कि कोर्ट ने कहा था कि आपसी सहमति से राम राम मंदिर बनाया जाए। इस पर इक़बाल ने कहा कि “यह संभव नहीं है “और आरोप लगाते हुए कहा

कि मेरे पिता और ज्ञानदास ने जब भी इस समस्या का हल निकालने की पहल की तो विहिप और अन्य संगठनों ने इस पर राजनीति शुरू कर दी। मामला आगे

बढ़ने से पहले ही बयानबाजी और राजनीति शुरू हो गई। नारे लगने लगे कि बाबरी मस्जिद अयोध्या में बनने नहीं देंगे। हमारी लड़ाई भी उसी हक की है। वहां

मस्जिद थी, हमारे पास उसके सबूत हैं और हमने अदालत में सबूत भी प्रस्तुत किये हैं। अब अदालत का जो भी फैसला होगा वह हमें मंज़ूर होगा।

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