दहाड़े मार के रोया भारत परमजीत सिंह जी के अंतिम संस्कार में और याद आया 23 मार्च 1931 का दिन

देश के लिए बलिदान हुए परमजीत सिंह का सम्मान के साथ अंतिम संस्कार हुआ. उनके अंतिम संस्कार के दौरान उमड़ी भीड़ को देख कर भगत सिंह की याद आ गई जैसे 23 मार्च 1931 को लाहौर जेल के बहार भीड़ जमा थी, वैसे ही भीड़ परमजीत सिंह जी के अंतिम संस्कार में उमड़ी. जुबान पर पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे थे और आँखों में बलिदानी परमजीत सिंह जी के लिए आंसू और दिल की हर धड़कन के साथ एक ही आवाज- इस बर्बरता का बदला चाहिए.

वहीं दूसरे बलिदानी जवान प्रेम सागर के भाई ने कहा कि मेरा भाई ने देश के लिए अपना बलिदान दें, हमें इस बात पर गर्व है. उनके भाई ने कहा कि मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी से प्राथना करना चाहूंगा, कि जैसे पाकिस्तान हमारे जवानों के साथ करता है वैसे ही हम भी उनके साथ करें. अब समय अ गया है जैसे को तैसा जवाब देना का, बता दें कि उत्तर प्रदेश के देवरिया निवासी 50 वर्षीय प्रेम सागर की पत्नी ने प्रेम सागर जी से सोमवार सुबह ही फोन पर बात की थी, और उन्होंने प्रेमसागर की तबीयत और ब्लड प्रेशर के बारे में पूछा था. लेकिन देर रात पता चला कि प्रेम सागर ने देश के लिए बलिदान दे दिया.

पाकिस्तान के द्वारा मेंढर सेक्टर में भारत पाक की नियंत्रण रेखा को पार करके पाकिस्तान ने जो घिनौना काम किया है उसके विरोद्ध में पूरा देश आक्रोशित है. भारत में कई जगह पर लोग सड़क पर आकार पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगा रहे है. बड़े से लेकर बच्चा हर कोई पाकिस्तान की इस बर्बरता का जवाब देने को सरकार से गुहार लगा रहा है. हर कोई क्रोधित है. बलिदान हुए दोनों जवानों के शवो को उनके घर पंहुचा दिया है. बलिदान हुए परमजीत सिंह का पार्थिव शरीर पंजाब में उनके घर पहुंचा गया है. परमजीत सिंह की पत्नी ने कहा कि अभी तक सरकार का कोई भी प्रतिनिधि उनसे मिलने नहीं आया है. तो वहीं बलिदानी परमजीत सिंह जी की बेटी ने कहा कि हमें अपने पिता का पूरा शव चाहिए आधा नहीं.

बलिदानी प्रेमसागर के गॉव देवरिया में भी लोगों का आक्रोश देखने को मिला. सबने प्रधानमंत्री मोदी से आह्वान किया है कि हम सब को बदला चाहिए. इसके साथ ही बलिदानी प्रेमसागर जी की दोनों बेटियों ने भी पाकिस्तान से बदला लेने की बात कही है. उन्होंने गुहार लगाई है कि उनके पिता के ना होने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ही उनकी देखरेख करें. बेटी सरोज ने अपने पिता के बलिदान के बदले पाकिस्तानी सेना के 50 सिर की मांग की है. आपको बता दें कि अभी प्रेमसागर के घर पर काम चल रहा है, प्रेमसागर जब भी आते थे तो अपने घर को बनाने का काम करवाते थे. वहीं दूसरी ओर परमजीत सिंह ने भी अपने घर के काम को पूरा करवाने के लिए दो माह की छुट्टी ले रखी थी. विडंबना की बात यह है कि परमजीत का शव उसी घर में रखा गया, जिसके लिए वह घर आए हुए थे.

भारतीय सेना ने जवाबी कार्रवाई में एलओसी के उस पार मौजूद पाक सेना की तीन चौकियों को ध्वस्त कर दिया, वहीं कश्मीर में पाकिस्तान विरोधी नारे लगाए गए. बलिदान हुए दोनों जवानों के पार्थिव शरीरों को पूरे सैन्य सम्मान के साथ मंगलवार को जब जम्मू के लिए रवाना किया तो उसके साथ ही लोगों ने पाकिस्तान के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. एक तरफ जवानों के शरीर को ले जाया जा रहा था और दूसरी तरफ भीड़ खड़ी हुई नारे लगा रही है. नारों में, पाकिस्तान हाय-हाय, इंडियन आर्मी आगे बढ़ो हम तुम्हारे साथ है और भारत माता की जय लगाये.

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