गुजरात के मंदिरों में आरती दिखाने वाले संसद में मांगा करते थे गौ रक्षकों के लिए फांसी. ये सोच कर कोई देख नहीं रहा

कांग्रेस हारी और फिर से हारी… कांग्रेस गिरी और मुंह के बल जोरदार गिरी… कांग्रेस को नाकार जनता ने और एक बार फिर से नकारा… अब कांग्रेस को सोचना चाहिए की उसकी रणनीति में कौन सी कमी रह गई की वो लगातार हार रही है और अपनी राष्ट्रीय पार्टी की छवि को धूमिल कर रही है. कांग्रेस की नस को जनता ने पहचान लिया है और वो जानती है की कांग्रेस ढकोसले बाज है.

ये वही कांग्रेस है जो संसद में गौ रक्षकों को फांसी देने कि मांग करता और गुजरात में जाके मंदिर में मत्थे टेकता है.

आपको बता दे कि गुजरात में विधानसभा की सभी 182 सीटों के रुझान आ गए हैं. बीजेपी को बहुमत से ज्यादा सीटें मिलती दिख रही है. हालांकि कांग्रेस उतनी मजबूती से नहीं उभर पाई जैसा पार्टी ने दावा किया था. कांग्रेस के मौजूदा प्रदर्शन का काफी हद तक श्रेय उस तिकड़ी को जाएगा पर जो भी हो तिगडी को भी जातिगत राजनीति करने के लिए गुजरात की जनता ने सबक सिखा दिया और जता दिया उनके दिल में नरेन्द्र मोदी है, बाकी ढकोसले करने वाले लोगों के लिए उनके यहां कोई जगह नहीं.

कांग्रेस की दोहरी नीतियों का काला चेहरा जनता पहचान रही है और बता दिया की सच्चाई की अहमियत है.
गुजरात और हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव 2017 के नतीजों से एक बार फिर साफ हो गया कि केन्द्र सरकार द्वारा बीते एक साल के दौरान आर्थिक सुधारों की दिशा में लिए गए कड़े कदम चुनाव का मुद्दा नहीं बन पाए. इन दोनों राज्यों में जहां विपक्ष ने नोटबंदी और जीएसटी को मुद्दा बनाते हुए केन्द्र में सत्तारूढ़ बीजेपी को घेरने की कोशिश की, वहीं चुनाव नतीजों ने साफ कर दिया है कि विपक्ष के इस सबसे बड़े दांव की हवा पूरी तरह से निकल चुकी है.


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