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चीनी फौजी क्या बोल रहे क्या चाह रहे, अब सब जानेगी अपनी फौज, जानिए कैसे

भारतीय सेना अपने आप को हर तरीके से मजबूत कर रही है। डोकलाम विवाद में भारत बिना कोई युद्ध किये चीनी सेना को वापस भेज दिया। भारतीय सेना की

ताकत को और बढ़ाने के लिए विदेशो से जहाजों को आयात हो रहा है। हथियारों और जहाजों से अपने आप को मजबूत करने के बाद अब भारतीय सेना अपने आप

को भाषा में भी परिपक्व करना चाहता है।

भारतीय सेना को हर तरह से तैयार और ताकतवर बनाने की दिशा में समझदारी का परिचय देते हुए भारत ने अपनी सेना को चीनी भाषा सीखाने का फैसला लिया

है।

इस काम का जिम्मा विश्वभारती विश्वविद्यालय के चीनी भाषा के विशेषज्ञों ने उठाया है। बता दें कि डोकलाम विवाद के बाद भारतीय सेना में चीनी भाषा की

समझ रखनेवाले जवानों की मांग बढ़ गयी है।

इस विषय पर सेना के प्रवक्ता विंग कमांडर एसएस बिर्डी ने बताया कि विश्वभारती विश्वविद्यालय के साथ करार हुआ है, जिसके तहत सेना के जवानों को

विशेषज्ञ चीनी भाषा और उनके इशारों को समझने का प्रशिक्षण देंगे।

रोयह फैसला भविष्य में आने वाली स्थिति को देखते हुए लिया ताकि जिस तरह डोकलाम में

लगातार 80 दिनों तक दोनों सेना आमने-सामने थी, वहां भारतीय सेना के सामने चीनी भाषा के जानकार जवानों की बेहद जरूरत थी लेकिन चीनी भाषा का ज्ञान

न होते हुए कुछ जवाब न दे पाए।

ये हालात दुबारा न दोहराया जाये इसलिए यह फैसला लिया गया है। विश्वभारती विश्वविद्यालय के चीनी भाषा के विशेषज्ञों द्वारा चीनी भाषा सिखने के बाद हमारे

जवान जो चीनी सीमा पर विभिन्न हिस्सों में तैनात हैं वे इस मामले में पारंगत हो कि वे चीनी नागरिक या फिर सैनिक उनके मंसूबों को भांप कर उनकी ही भाषा

में जबाब दे सकें।

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