देवदूत बन कर केरल में सामने आई भारतीय नौसेना…. तूफान के आगे चट्टान बन कर हुई खड़ी


भारतीय सेना भारत के लोगों के लिए कुछ भी कर सकती और इसमें रत्ती भर भी सक नहीं कि वो हमारे लिए सिर उठा कर चलने का विषय है। एक फिर से भारतीय सेना ने हमें गर्व करने का मौका दिया है भारतीय नौसेना ने, हम सेना की वजह से ही सुरक्षित है और उन्ही की वजह से चैन का नींद सोते है।

वो कहते है न ‘ तूफ़ान की क्या हस्ती, जब चट्टान हो सामने’ और ये चट्टान थी भारतीय नौ सेना….

मौत के मुँह में खड़े थे वो लोग और भारतीय नौ सेना उनके लिए जीवन का वरदान बन कर पहुंची। विदित हो कि जब केरल में ओखी चक्रवात आया तब बहुतों की जान खतरे में थी और फिर ईश्वर सेना और तटरक्षक बल ने शुक्रवार को समुद्र में फंसे मछुआरों को बहुत ही बड़े पैमाने पर खोज अभियान चला कर उन्हें मौत के मुँह से बाहर निकाला।

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने शुक्रवार की रात को तूफान की चेतावनी के बाद कई नौसैनिक जहाजों और हेलिकॉप्टरों को सेवा में भेजा था। तटरक्षक और अन्य राज्य आपदा प्रबंधन के अधिकारी भी खोज और बचाव मिशन में शामिल हुए थे। जिसके बाद बड़े मात्रा में लोगों को बचाया गया।
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक उनकी जान सुरक्षित है और बचाए गए मछुआरों को और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया जा रहा है।

आपको बता दे कि अब तक चक्रवात ओखी के चलते खराब हुए मौसम के कारण समुद्र में फंसे केरल के 218 मछुआरों को बचाकर शुक्रवार को तट पर लाया गया है । वहीं राज्य में बारिश के कारण हुई दुर्घटनाओं में मरने वालों की संख्या बढ़कर सात हो गई । ‘ओखी’ एक बांग्ला शब्द है जिसका अर्थ ‘आंख’ होता है. शुक्रवार को यह गंभीर चक्रवात तूफान में तब्दील हो गया और अरब सागर की ओर बढ़ गया । इसका केंद्र लक्षद्वीप के मिनीकॉय में उत्तर- उत्तरपूर्व में करीब 80 किलोमीटर पर है. इसके प्रभाव से राज्य के तटीय इलाकों में भारी बारिश हो रही है जिससे जनजीवन पर असर पड़ा है ।


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