चीन की महत्वाकांक्षी योजना का भारत ने किया बहिष्कार. कहा- संप्रभुता के उल्लंघन वाला प्रोजेक्ट स्वीकार नहीं


नई दिल्ली : भारत ने हाल ही में चीन की शुरु होने वाली वन बेल्ट-वन रोड योजना का बहिष्कार करने के लिए अधिकारिक तौर पर घोषणा कर दी है। आपको बता दें कि चीन की ये योजना रविवार को शुरु होने वाली है। भारत खुले तौर इसका बहिष्कार करेगा। ऐसा वह इस योजना के अंतर्गत आने वाले चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (सीपीईसी) के पाक के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) से गुजरने के विरोध में कर रहा है।

जबकि अप्रैल में चीन के विदेश मंत्री वांग ई ने भारत के सम्मेलन में हिस्सा लेने का भरोसा जताया था। इस मामले को लेकर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गोपाल बागले ने कहा कि अपनी सैदांतक स्थिति के तहत हम चीन से उसके इस पहल के बातचीत का आग्रह भी कर चुके है और हम इस बात पर चीन की तरफ से सकारात्मक जवाब का ही इंतजार कर रहे है।

कोई भी देश संप्रभुता और क्षेत्रीय एकता पर उसकी मुख्य चिंताओं को नजरअंदाज करने वाली परियोजना को स्वीकार नहीं करेगा। राष्ट्रपति शी चिनफिंग के ड्रीम प्रोजेक्ट वन बेल्ट-वन रोड पर चीन दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित कर रहा है। इस प्रोजेक्ट के तहत चीन सड़क, रेल, जल और वायु मार्ग से यूरोप और अफ्रीका से संपर्क बढ़ाएगा। इससे वह दुनिया के सुदूर हिस्सों को अपनी व्यापारिक गतिविधियां से जोड़ेगा, कच्चा और तैयार माल भेजेगा व मंगवाएगा।

अपनी इसी बात को ध्यान में रखते हुए चीन अपनी इस परियोजना के सम्मेलन में ज्यादा से ज्यादा देशों को जोडकर अपने सम्मेलन की सफलता को जोडकर देख रहा है और इसी वजह से वह भारत समेत अन्य देशों को भी इस सम्मेलन से जोड़ने की कोशिश कर रहा है। बता दें कि अमेरिका और जापान चीन के साथ अपने मतभेदों को भुलाते हुए इस सम्मेलन में हिस्सा ले रहे है। इस सम्मेलन में रुसी राष्टपति व्लादिमीर पुतिन समेत 29 देशों के प्रमुख् हिस्सा लेंगे।

सिल्क रोड योजना पर हो रहे सम्मेलन में चीन सभी देशो का स्वागत करता है। चीनी विदेश मंत्रालय ने यह बात अमेरिकी की उस चेतावनी पर कही है जिसमें सम्मेलन में उत्तर कोरिया के भाग लेने पर गलत संदेश जाने की आशंका हुई थी। बता दें कि फिलहाल अमेरिका इस सम्मेलन लेगा ।  परमाणु बम और मिसाइल परीक्षण के मुददे पर उत्तर कोरिया और अमेरिका इसके अलावा दक्षिण कोरिया व जापान के बीच इन दिनों तनातनी चरम पर है संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने उत्तर कोरिया पर व्यापक आर्थिक प्रतिबंध लगा रखे हैं।


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