भैंसों के सींग पर मालिश का खर्च 16 लाख ? लालू थे तो मुमकिन था

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री तथा राष्ट्रीय जनता दल के प्रमुख लालू प्रसाद यादव एक बार फिर से सुर्ख़ियों में आ गये हैं. वो लालू यादव जो चारा घोटाले में जेल की सलाखों के पीछे हैं. इस बार लालू यादव के बारे में जो जानकारी सामने आई है जो लालू के रहते ही मुमकिन थी. मामला मालिश का है, भैंसों के सींगों की मालिश. बिहार सरकार ने हाल ही में खुलासा किया है कि लालू यादव के समय सिर्फ भैंसों के सींग की मालिश करने के लिए 16 लाख रुपये खर्च कर दिए गए.

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बताया गया है कि भैंसों के सींगों के इस मालिश के लिए पांच सालों में (साल 1990-91 से 1995-96) कुल मिलाकर 16 लाख रुपये का सरसों का तेल खरीदा गया था. गौरतलब है कि इस मामले में लालू प्रसाद यादव जेल में हैं. बिहार सरकार ने ये खुलासा विधानसभा में बिहार विनियोग अधिकाई व्यय विधेयक 2019 को पेश करने के दौरान किया. 1977-78 से लेकर 2015-16 के दौरान किए गए अधिकाई व्यय को विनियमित कराने के लिए यह विधेयक मानसून सत्र में विधानसभा में पेश किया गया.

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बताया गया है कि कि 1990-91 से 1995-96 तक कुल मिलाकर 16 लाख रुपये में 49,950 लीटर सरसों का तेल खरीदा गया था. होटवार दुग्ध आपूर्ति सह डेयरी फार्म के महाप्रबंधक डॉ जेनुअल भेंगराज ने वरिष्ठ अधिकारियों और शीर्ष नेताओं की मिलीभगत से तेल का नकली बिल तैयार किया. चारा घोटाले से संबंधित ये नया खुलासा बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने बुधवार को विधानसभा में बिहार विनियोग अधिकाई व्यय विधेयक 2019 को पेश करने के दौरान किया. उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा अत्यधिक व्यय या आवश्यकता को बजट के माध्यम से लिया जाता है लेकिन लालू प्रसाद यादव की अगुवाई वाली तत्कालीन सरकार ने इसका पालन नहीं किया.

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सुशील कुमार मोदी ने आगे कहा कि इसके बजाय फर्जी बिलों के माध्यम से जनता के धन को लूटने के लिए बजटीय आवंटन से अधिक निकासी की गई. हालांकि, पशुपालन विभाग द्वारा खर्च किए गए 658 करोड़ रुपये की राशि पर विचार नहीं किया जा सकता है क्योंकि चारा घोटाले के ये मामले रांची और पटना में सीबीआई कोर्ट के पास लंबित हैं. पशुपालन विभाग की जांच से पता चलता है कि 1990 के बाद बजटीय आवंटन में वृद्धि के माध्यम से संगठित लूट को अंजाम दिया गया और जाली बिलों के माध्यम से अत्यधिक निकासी की गई.

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