इशरत को अकेला कर दिया धर्म निरपेक्षता के ठेकेदारों ने… कसूर सिर्फ उस दर्द का एहसास कराना जो मिल रहा था करोड़ो को..


सुप्रीम कोर्ट में तीन तलाक के खिलाफ याचिका दायर करने वाली और मुस्लिम महिलाओं को अपना हक दिलाने वाली इशरत जहां को सामाजिक भेदभाव के खिलाफ लड़ाई में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद इशरत को नई रोशनी की उम्मीद थी, लेकिन अभी के हालात उसके ठीक उल्टे हैं जैसा इशरत ने सोचा था।

बता दें कि इशरत ने सोचा था कि कोर्ट के फैसले के बाद उनकी मुश्किलें कम हो जाएंगी लेकिन वह ये नहीं जानती थी कि इसके बाद उन्हें सामाजिक बहिष्कार को भी झेलना पड़ेगा। इशरत को रिश्तेदारों और पड़ोसियों की आलोचना झेलनी पड़ रही है। दरअसल, पश्चिम बंगाल के हावड़ा की रहने वाली इशरत को उसके पति ने दुबई से फोन पर तलाक दे दिया था।
इतना ही नहीं उसके पति ने चारों बच्चों को उससे छीन लिया। इसके बाद पति ने दूसरी शादी कर ली और उसे यूं ही बेसहारा छोड़ दिया। इशरत ने याचिका दायर कर तीन तलाक को असंवैधानिक और मुस्लिम महिलाओं के गौरवपूर्ण जीवन जीने के अधिकार का उल्लंघन बताया था।
वहीं, इस मामले में इशरत जहां का कहना है कि अब वह पहले से कहीं ज्यादा अकेला महसूस करती है। इसके साथ ही कहा कि कोर्ट का फैसला आने के बाद से हालात और भी बदतर हो गए हैं, लोगों ने उनका बहिष्कार कर दिया है। इशरत को अकेला कर दिया धर्म निरपेक्षता के ठेकेदार ने।
     

सुदर्शन के राष्ट्रवादी पत्रकारिता को आर्थिक सहयोग करे और राष्ट्र-धर्म रक्षा में अपना कर्त्तव्य निभाए
DONATE NOW

Share
Loading...

Loading...