पश्चिमी UP बन रहा ISI का गढ़ जबकि भारत जूझ रहा ISIS के आतंक से

एकतरफ हिंदुस्तान ISIS के आतंक से जूझ रहा है तो वहीं दूसरी तरफ पश्चिमी उत्तर प्रदेश आतंकी मुल्क पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी ISI का गढ़ बनता जा रहा है. सूत्रों के हवाले से मिली खबर के मुताबिक़, पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई असलहा तस्करों के सहारे वेस्ट यूपी में नापाक मंसूबों को अंजाम देने की फिराक में है.  इनमें से कुछ सप्लायर आईएसआई के लिए स्पीलिंग मॉड्यूल की तरह काम कर रहे हैं. राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) और आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस) के इनपुट मिलने पर पुलिस भी एक्टिव हो गई है. पुलिस अधिकारी कहते हैं कि 30 साल पहले भी आईएसआई ने हथियार सप्लायरों के जरिये ही वेस्ट में जड़ें फैलाई थीं.

गौरतलब है कि साल 1990 में आईएसआई ने अवैध हथियार, नकली करेंसी को लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ, मुजफ्फरनगर, शामली और सहारनपुर समेत कई जिलों में अपनी जडे़ं फैलाई थीं. इकबाल काना और दिलशाद मिर्जा निवासी कैराना साल 1992 में हथियारों की खेप के साथ पकड़े गए थे जिनके पाकिस्तान की आईएसआई से संपर्क थे. शिकंजा कसते ही दोनों साल 1995 में भारत छोड़कर पाकिस्तान भाग गए थे, इसके अलावा भी कई हथियार सप्लायरों के जरिये आईएसआई ने जडे़ं फैलाईं. ठीक इसी तरह से आईएसआई अब फिर से वेस्ट में हथियार सप्लायरों को मोहरा बनाकर अपनी जड़ें जमाने की कोशिश कर रही है.

ज्ञात हो कि 26 दिसबंर 2018 को एनआईए ने हापुड़, मेरठ और अमरोहा समेत 17 जनपदों में आईएस व आईएसआई एजेंटों से जुड़े संदिग्धों की तलाश में छापेमारी की थी. हापुड़ व मेरठ में एनआईए ने हथियार सप्लायर तलाशे जिनके संपर्क आईएस और आईएसआई से जुड़े होने बताए थे. इससे पहले भी एनआईए लुधियाना में आरएसएस नेता रविंदर गोसाई की हत्या के मामले में वेस्ट यूपी के सप्लायरों से हथियार खरीदने की बात कही थी. NIA द्वारा गिरफ्तार नईम से पूछताछ से स्पष्ट हुआ कि आईएसआई भी जानती है कि राधना में अवैध हथियार बिकते हैं. इसको लेकर आईएसआई एजेंट ने पहले नईम के रिश्तेदार साकिब से संपर्क किया और फिर राधना गांव में पहुंच गई. आईएसआई को क्या-क्या जानकारी है और वह किस-किस के संपर्क में है. इसकी जानकारी जुटाने के लिए एनआईए और सुरक्षा एजेंसियां साकिब व नईम का आमना सामना भी करा सकती हैं. एनआईए की पूछताछ में कई और राज खुल सकते हैं.

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार जोन में एक साल में दस हजार से ज्यादा हथियार बरामद किए गए हैं. तमंचे और पिस्टल फैक्ट्री पकड़ी गईं. असलाह कारीगरों को पुलिस गिरफ्तार कर जेल भेज देती है लेकिन सरगना या फिर सप्लायर कैसे बच जाते हैं, ये जांच का विषय है. इसको लेकर कई बार पुलिस की कार्यशैली पर सवाल भी उठे हैं. हथियार सप्लायरों का नेटवर्क पुलिस के लिए भी चुनौती बन गया है. आईएसआई से कनेक्शन के बाद तो यह और भी खतरनाक हो गया है.

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