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मौलाना का साफ़ एलान– मुसलमान चलेंगे शरिया की राह पर.. चुनौती किसको? क़ानून को या कोर्ट को ?

लोकसभा से तीन तलाक बिल पास हो जाने के बाद सर्द दिसंबर में देश में सियासी गर्मी बढ़ती हुई दिखाई दे रही है. सोमवार को ये बिल राज्यसभा में पेश होना है लेकिन इससे पहले तीन तलाक बिल के प्राबधानों को लेकर सियासी बयानबाजी जारी है. कांग्रेस पार्टी ने एलान कर दिया है कि वह राज्यसभा में बिल का विरोध करेगी तो इस्लामिक मौलाना तथा नेता खुलकर बोल रहे हैं कि उनके लिए सिर्फ और सिर्फ शरिया क़ानून मायने रखता है, इसके अलावा वह और किसी कानून को नहीं मानने वाले हैं.

लोकसभा में तीन तलाक बिल पास होने के बाद जमीयत उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना सैय्यद अरशद मदनी ने कहा कि इस बिल की कोई अहमियत नहीं है. सरकार चाहे कितनी बिल क्यों न बना ले लेकिन जो लोग इस्लाम को मानते हैं वो शरीयत पर जरूर अमल करेंगे. शनिवार को केंद्र के तीन तलाक बिल पर बात करते हुए मौलाना सैय्यद अरशद मदनी ने कहा कि सरकार इस बिल को लोकसभा में पेश करेगी इसकी जानकारी हमें पहले से थी, लेकिन इस बिल की कोई अहमियत नहीं है क्योंकि मुसलमानों में दो तबके हैं एक वो जिसने अपनी जिंदगी को इस्लाम के मुताबिक बनाया है वो चाहे मर्द हो या औरत. दूसरा तबका वो है जो इससे आजाद चल रहा है शराब पीते हैं और वो काम करते हैं जो इस्लाम में नाजायज हैं.

मौलाना मदनी ने कहा कि यह मसला भी ऐसा ही है आप एक कानून नहीं पचास कानून बना लें, लेकिन जो मुसलमान हैं, लड़की और उसके घरवाले समझते हैं कि तलाक हो गई और अब हमारी बच्ची इसके साथ (तलाक देने वाले शौहर के साथ) रहेगी तो इसका रहना उसके साथ हराम होगा और जो औलाद होगी वो हराम होगी तो वह इस मसले से पीछे नहीं हटेंगे. मौलाना मदनी ने कहा कि मुसलमान सिर्फ शरिया कानून को मानता है, उसी एक अनुसार चलता है और चलेगा. इसके अलावा मुसलमान को कोई और कानून मंजूर नहीं हो सकता.

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