वो वीरांगना हुई रिटायर जिसने फंदे पर लटकाया था कई दुर्दान्त आतंकियों को… जानिए उनकी गौरव गाथा

मुंबई हमलों का एकमात्र जिंदा आतंकवादी जिसने स्कूल की पढ़ाई बीच में छोड़कर ‘जिहाद’ को अपने जीवन का लक्ष्य बनाया। एक मात्र जीवित हमलावर अजमल आमिर कसाब के लिए बुधवार की सुबह आखिरी और काली थी। ऑपरेशन एक्स के तहत बेहद गोपनीय तरीके से कसाब को मुंबई की आर्थर रोड जेल से पुणे की यरवडा जेल ले जाया गया और इस अभियान को अंजाम दिया पुलिस के चंद आला अफसरों ने।

इस अभियान में मीरा चड्ढा बोरवणकर देश की इकलौती महिला आईपीएस ऑफिसर रही जिनके सामने फांसी की सजा दी गई। मुंबई में 26/11 हमलों के दोषी अजमल आमिर कसाब और 1993 मुंबई अटैक के दोषी याकूब मेमन को मीरा की देखरेख में ही फांसी दी गई थी। जिसके बाद मीरा शनिवार को पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ब्यूरो के डायरेक्टर जनरल पद से रिटायर हो गई। रिटायर होने के बाद मीरा चड्ढा ने अजमल कसाब और मेनन के फांसी से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण बातें मीडिया और लोगों के सामने रखी।


 

बोरवांकर ने बताया कि कसाब को फंदे पर लटकाने से पहले यह बात किसी तक न पहुंचे इसकी जिम्मेदारी हमारे कंधों पर थी। वहीं, याकूब मेमन के मामले में पूरे देश की नजर उसे दी जाने वाली फांसी पर थी। उस मामले में अदालत के फैसले को प्रभावी ढ़ग से लागू कराने की जिम्मेदारी हम सब की थी। इसके साथ ही बताया कि मीडिया को भी इसकी भनक न लगे, इसलिए उन्होंने अपनी गाड़ी छोड़कर, गनर की बाइक से यरवदा जेल जाने का फैसला किया।

इसके आलावा कसाब की मौत के बाद उसके धर्म के हिसाब से अंतिम संस्कार किया गया था। वहीं, बोरवांकर ने बताया कि मेनन को जब मैं फांसी के लिए नागपुर सेंट्रल जेल गई तो मुझसे कहा कि मैडम चिंता मत करो, कुछ भी नहीं होने वाला है, मुझे कुछ नहीं होगा, मैं उनकी ताकत पर चकित थी। मेमन के मामले को याद करते हुए बोरवांकर ने कहा कि मेनन का परिवार बहुत सक्रिय था। वह हर हाल में उसे छुड़ाने के लिए प्रयासरत थे।


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