कश्मीर के नारे अलीगढ़ में… नारे लगाने वालों को वहां बोला जाता है “छात्र”

क्या अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी अलगाववाद का नया केंद्र बन रही है? क्या कश्मीर की आग को अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के माध्यम से पूरे देश में फैलाने का प्रयास किया जा रहा है? ये आशंका तथा सवाल इसलिए खड़े हो रहे हैं क्योंकि पिछले कुछ समय से AMU में इस तरह की गतिविधियाँ हो रही हैं जो कहीं न कहीं राष्ट्र की एकता तथा अखंडता को प्रभावित कर रही हैं, साथ ही सांप्रदायिक सद्भाव को बिगाड़ रही हैं. हिंदुस्तान को बाँटने वाले जिन्ना की तस्वीर के समर्थन में जिस तरह से AMU का एक बड़ा वर्ग खड़ा हुआ था, उससे पूरा देश चिंतित हो उठा था. उसके बाद इसी AMU में शाकाहारी छात्रों के लिए चिकन की कढ़ाई तथा तेल में खाना पकाने का मामला सामने आया था तो इस बार AMU के कुछ छात्रों के निशाने पर भारतीय सेना है.

खबर के मुताबिक़, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी उस समय अलगाववाद का नया केंद्र बनती हुई दिखाई दी जब कश्मीर में भारतीय सेना के खून के प्यासे आतंकपरस्त पत्थरबाजों के समर्थन में जुलूस निकाला गया. AMU में आतंकपरस्त पत्थरबाजों के समर्थन में तथा देश की रक्षक भारतीय सेना की आतंक के खिलाफ कार्यवाई के विरोध में ये जुलूस एएमयू छात्रसंघ के पदाधिकारियों व छात्रों ने निकाला.

खबर के मुताबिक़, जुलूस के बाद छात्रसंघ पदाधिकारियों ने एसीएम द्वितीय को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा, जिसमें 15 दिसम्बर को कश्मीर में सेना द्वारा मारे गए 7 पत्थरबाजों को निर्दोष बताया गया है. इस ज्ञापन में कश्मीर में मानवाधिकारों के हनन पर रोक लगाने की  की मांग की गई है. जुलूस निकाल रहे लोगों ने कहा कि कश्मीर में पिछली 15 दिसंबर को सेना द्वारा 7 निर्दोष कश्मीरियों को मार दिया गया जो मानव अधिकारों का साफ हनन है, इसे रोकना चाहिए.

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