30 साल बाद 300 कश्मीरी हिन्दू वहां करेंगे पूजा जो थी उनकी जमीन और कब्जा कर लिया था मजहबी उन्मादियों ने

वो पल कश्मीरी उन 300 कश्मीरी हिन्दुओं के लिए सबसे खुशनुमा पल होगा जब वो कश्मीर जाकर उस जगह पूजा करेंगे, जहाँ 30 साल पहले तक रहते थे. लेकिन 30 साल पहले कश्मीरी हिन्दुओं के साथ वो हुआ, जिसकी कल्पना करने मात्र से ही रूह कांप उठती है. लगभग 30 साल पहले इस्लामिक चरमपंथियों द्वारा बेरहमी के साथ कश्मीर में हिन्दुओं का क़त्ल किया गया, उनकी बहन-बेटियों के साथ बलात्कार किया गया, जो बच गये उनको कश्मीर छोड़ना पड़ा. कश्मीरी हिन्दुओं की ये पीड़ा, ये दर्द, उनकी चीखें आज भी रौंगटे खड़े कर देती हैं.

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आपको बता दें कि इस घटना के लगभग 30 साल बाद घाटी छोड़ चुके करीबी 300 कश्मीरी हिन्दुओं को एक बार फिर अपनी मिट्टी से जुड़ने का मौका मिला है. जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने श्रीनगर के पास क्षीर भवानी मां के दर्शन के लिए इन लोगों को न्योता दिया है. यात्रा पर जा रहे कुछ के लिए यह किसी सपने के सच होने जैसा है, वहीं कुछ इसे घर वापसी के प्रयास के पहले कदम के तौर पर देख रहे हैं. करीब 30 साल पहले कश्मीर से विस्थापित हुईं दीपिका भान भावुक होकर कहती हैं कि फिलहाल अभी यह हमारी घर वापसी नहीं हो, लेकिन हमारे लिए उम्मीद की किरण है.

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दीपिका आगे कहती हैं कि मां क्षीर भवानी का दर्शन करना बेहद खुशी का पल है तथा उम्मीद है कि इससे उनके जैसे तमाम कश्मीरी हिन्दुओं की जो घर वापसी उम्मीद जगी है वो भी पूरी होगी. यात्रा पर जा रहे निजी विश्वविद्यालय में सहायक रजिस्ट्रार 58 वर्षीय दीपक कौल और उनकी पत्नी भारती कौल के लिए यह सपना सच होने जैसा है, जिसे वे कश्मीर से विस्थापित होते समय भुला आए थे. भारती कौल के मुताबिक यह कुछ दिन की यात्रा उन्हें घर वापसी के कम नहीं लग रही है.

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इस बात की जानकारी मिलने पर कश्मीर एजूकेशन कल्चर एंड साइंस सोसायटी के समन्वयक सतीश महलदार ने कहा कि यह कोशिश कोशिश घर वापसी के आगाज का पहला कदम हो सकती है, क्योंकि बड़ी संख्या में स्थानीय लोग भी उनके स्वागत के इंतजार में हैं. जम्मू-कश्मीर भवन से जत्था 10 जून को होने वाले माता खीर भवानी के ज्येष्ठ अष्टमी पूजन के लिए रवाना होगा. यात्रियों का खर्च और सुरक्षा की जिम्मेदारी राज्यपाल उठाएंगे. करीब सप्ताह भर की यात्रा में यह लोग राज्यपाल के खास मेहमान होंगे. इस  यात्रा में  सभी मेहमानों की खीर भवानी के अलावा हरि पर्वत श्रीनगर, शंकराचार्य मंदिर होते हुए  13 जून को दिल्ली वापसी होगी.

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