आतंकी बुरहान वानी के खात्मे के बाद आतंकी संगठनों में तेजी से शामिल हुए कश्मीरी युवा

नई दिल्ली : भारत की खुफियां एजेंसियों और सुरक्षाबलों के लिए कश्मीर से एक और चिंता बढ़ाने वाली खबर है। कश्मीर युवकों को आतंकी संगठनों के बहकावे में नहीं आने से रोकने के लिए रियासत सरकार के जरिए शुरू की गई काउंसलिंग बेअसर साबित हो रही है। हिजबुल मुजाहिदीन, जैश-ए मोहम्मद और लश्कर-ए तैयबा ने शिक्षित कश्मीरी युवकों की भर्ती के लिए मुहिम तेज कर दी है।

आतंकी बुरहान वानी की मौत के बाद दक्षिणी कश्मीर से सबसे अधिक 88 कश्मीर युवक आतंकी संगठनों में शामिल हुए हैं। पाकिस्तान से घुसपैठ कर आने वाले आतंकियों के अलावा स्थानीय आतंकियों ने सुरक्षाबलों के लिए नई चुनौतियां खड़ीं की हैं। आपको बता दें कि जम्मू-कश्मीर पुलिस ने भटके युवकों की घर वापसी पर नरमी बरतने और काउंसलिंग से विकास की मुख्य धारा में शामिल करने के लिए अभियान शुरू किया है।

सरकार ने मंगलवार को लोकसभा में जानकारी दी कि जम्मू-कश्मीर में कम से कम 88 युवकों ने 2016 में आतंकवाद का रास्ता अपनाया है। यह आंकड़ा 2010 के बाद से सबसे बड़ा आंकड़ा है। साल 2014 और 2015 में आतंकी सगंठनों से  जुड़ने वाले युवाओं की संख्या में गिरावट दर्ज की गई थी लेकिन बुरहान वानी की मौत के बाद हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद युवा तेजी से आतंकी संगठनों के साथ जुड़े।

इस मामले में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री हंसरास गंगाराम अहीर ने संसद में यह जानकारी देते हुए कहा कि साल 2015 में 66, 2014 में 53, 2013 में 16, 2012 में 12, 2011 में 23 और 2010 में 54 युवक उग्रवादी बने थे। बुरहान सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय था और फेसबुक पर लगातार अपनी तस्वीरें और वीडियो पोस्ट करता था। सोशल मीडिया पर बुरहान की सक्रियता के चलते उसे कश्मीरी उग्रवाद का पोस्टर ब्वॉय कहा जाने लगा था।

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