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सबरीमाला के संघर्ष का आरोप संघ पर .. बहुत कुछ कहता है केरल के मुख्यमंत्री का बयान

जिस आवाज को सुदर्शन न्यूज ने प्रमुखता से उठाया था और दैवीय कानूनों में अदालती कानूनों का खुला विरोध किया था अब उस आवाज के खिलाफ कांग्रेसी और वामपंथी सुर खुल कर उभरने लगे हैं और हिन्दुओं के संघर्ष को सीधे सीधे संघ का संघर्ष कहना शुरू कर दिया है . यद्दपि अभी इस मामले में हिन्दू समाज न सिर्फ किसी अदालती आदेश के खिलाफ जाने के लिए तैयार है अपितु किसी राजनैतिक दल की बात को भी वो गम्भीरता से नहीं ले रहा है . फिलहाल अब इस मामले में आया है केरल के मुख्यमंत्री का बयान जिसमे उन्होंने सीधे सीधे दोषी ठहराया है संघ को .

विदित हो कि हिन्दुओ के लिए अब अस्तित्व और प्रतिष्ठा का सवाल बन चुके सबरीमाला मामले में शुरू हो चुकी है राजनीति और अब इस मुद्दे पर आया है केरल के मुख्यमंत्री पी विजयन का बेहद अजीब बयान . उन्होंने अतिविवादित मुद्दा बन चुके सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर विरोध प्रदर्शन के पीछे राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ  RSS को बताया है। विगत मंगलवार को मुख्यमंत्री विजयन ने कहा कि केरल सरकार और पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लागू करने की कोशिश की लेकिन आरएसएस ने सबरीमाला मंदिर को युद्ध क्षेत्र बना दिया है। उन्होंने कहा कि आरएसएस ने माहौल इतना खराब कर दिया कि मे महिलाओं के साथ मारपीट, पुलिस पर हमला और महिला पत्रकारों की गाड़ियों पर पथराव जैसी चीजें हुईं जो केरल में कभी नहीं हुई थी।

साबरीमाला मंदिर में दस से पचास साल की उम्र की औरतों को जाने की इजाजत पहले नहीं थी। सुप्रीम कोर्ट ने इसे गलत मानते हुए महिलाओं के प्रवेश पर बैन को हटा दिया। अदालत आदेश के बाद मंदिर के दरवाजे पांच दिवसीय पूजा के लिए पिछले हफ्ते खोले गए थे। हालांकि मंदिर खुलने के बाद जब कुछ महिलाओं ने मंदिर के भीतर जाने की कोशिश की तो कुछ संगठनों और मंदिर के लोगों ने इसका भारी विरोध किया और किसी भी महिला को अंदर दर्शन के लिए नहीं जाने दिया। विजयन के इस बयान को कांग्रेस तक ने भी कहीं न कहीं से समर्थन  देने की कोशिश की है और केरल में कांग्रेस और दूसरे विपक्षी दलों का कहना है कि ये फैसला ठीक नहीं है और मंदिर के रिवाजों को नहीं बदला जाना चाहिए। आरएसएस के लोग भी महिलाओं के मंदिर में प्रवेश को लेकर विरोध कर रहे हैं। इनका ये भी कहना है कि केरल की सरकार कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील करे। वहीं सरकार का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने अगर महिलाओं को प्रवेश की इजाजत दी है तो सरकार का ये फर्ज है कि वो आदेश का पालन करे। यद्दपि श्रीराम की जन्मभूमि अयोध्या से ले कर पद्मनाभन मन्दिर तक के मामलों में खुला हस्तक्षेप किसी अन्य मत या मज़हब के मामले में ऐसे फैसले क्यों नहीं देता सुदर्शन न्यूज ने अपने बिंदास बोल और जनसंसद में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया है और जनता को जवाब लेने के लिए प्रेरित किया है .

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