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मंदिरों से मिले आशीर्वाद का फल मिल रहा कांग्रेस को जबकि भाजपा को उत्तराखंड में मदरसों के खुलने का नहीं मिल रहा लाभ

मध्य प्रदेश, राजस्थान तथा छत्तीसगढ़ में जिस तरह से भारतीय जनता पार्टी की हार हुई है तथा कांग्रेस पार्टी को सफलता मिली है, उसमें कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का अहम् रोल माना जा रहा है. कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद राहुल गांधी ने सफलता की उस कुंजी को पकड़ा, जिसे पकड़कर भारतीय जनता पार्टी ने 2014 में सफलता हासिल की तथा उसके बाद राज्य दर राज्य भारतीय जनता पार्टी का साम्राज्य देशभर में फैलता गया. लेकिन अब राहुल गांधी भी उसी रास्ते पर चल पड़े हैं तथा उन्हें इसका फल भी मिलता हुआ नजर आ रहा है.

हम बात कर रहे हैं राहुल गांधी के मंदिर मंदिर जाने की.. कैलाश मानसरोवर से लेकर दक्षिण के तमाम मंदिरों तक राहुल गांधी पहुंचे. हिंदूत्व का चोला जो कल तक बीजेपी अकेले ओढ़कर बीजेपी बैठी हुई थी, राहुल गांधी ने भी उसको ओढ़ लिया. और भगवान का शीर्वाद सबको मिलता है तो राहुल गांधी को भी मिला क्योंकि भगवान अपने भक्तों के साथ भेदभाव नहीं करता है. एकतरफ राहुल गांधी मंदिर मंदिर गए और उन्हें भगवान का आशीर्वाद मिला लेकिन भाजपा को उत्तराखंड में मदरसों का लाभ नहीं मिला.

राहुल गांधी ये समझ गए थे कि संघ और भाजपा ने जिस तरह से कांग्रेस और उनके परिवार की छवि को एंटी-हिन्दू के रूप में प्रस्तुत किया है, उससे उन्हें सत्ता परिवर्तन का मौका नहीं मिलेगा. इसलिए उन्होंने भारतीय जीवन-दर्शन को केंद्र में रखते हुए सॉफ्ट हिंदूत्व का कार्ड खेला. कुछ राज्यों में फेल होने के बाद आखिरकार उन्हें सफलता मिली और भरपूर मिली. उनकी पार्टी ऐसे भी कई मौकों पर बोलती रही है कि ‘हिंदूत्व’ भाजपा की बपौती नहीं है इसलिए राहुल गांधी भी अपना जनेऊ दिखा सकते हैं और अपने गोत्र का खुलेआम प्रदर्शन कर सकते हैं. इन नतीजों से ये साफ हो गया है कि राहुल गांधी ने अपनी पुरानी छवि को धो दिया है. अगर अब भाजपा को उनका मुकाबला करना  है  तो उसके उसके मूल एजेंडे पर लौटना ही होगा.

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