कौन है वो दारा सिंह जिसको 21 साल से नहीं मिला एक भी पैरोल या फैरोल.. यहाँ तक कि अपने माता – पिता की चिता को आग देने के लिए भी


22-23 जनवरी वर्ष 1999 की मध्य रात्रि में उड़ीसा के क्योंझर-मयूरभंज जिलों की सीमा पर मनोहरपुर नामक ग्राम में अनगिनत लोगों का धर्मांतरण करवा चुके एक आस्ट्रेलियाई मिशनरी स्टेन्स और उसके दो पुत्रों को जीप में सोते समय जिन्दा जलाकर मारने की घटना ने भारत ही नहीं पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया , हमला धर्मनातरण करवाने वालों की जड़ पर था इसीलिए एक नाम बहुत चर्चा में आया जिसे सबने एक स्वर में कहा “दारा सिंह” ..

ये वो आवाज है जो अब तक किसी के भी मुह से नहीं निकली .. वो २१ साल से जेल की सलाखों के अंदर है और जेल में उसका व्यवहार एकदम सही और न्यायोचित था . उसका कितना टार्चर हुआ इसकी भी आज तक किसी को जानकारी नहीं है . तमाम ऐसे लोग इस बीच में जेल से दया के नाम पर छोड़ दिये गये हैं जो अपनी पत्नियों को टुकड़ों  में काट कर तंदूर में जलाते पकडे गये थे .. जैसे कांग्रेस के पूर्व नेता सुशील शर्मा और कई नक्सली और आंतकी जिन्होंने जीवन भर भारत के सैनिको पर हमले किये ..

ज्ञात हो कि न्याय के लिए भटक रहे उस व्यक्ति और परिवार का नाम है दारा सिंह जो उडीसा की क्योंझर जेल में लगभग २१ साल से हिन्दुओ के धर्मांतरण के खिलाफ खुद से आगे बढ़ कर हिंसक रूप में कानून को हाथ में लेने के अपराध में जेल काट रहा है . उसका नाम कहीं भी किसी के जुबान पर नहीं है जबकि कभी वो महीनों ही नहीं सालों तक रहा था मीडिया की सुर्खियाँ . इतना ही नहीं , उसी दारा सिंह पर आये थे लगभग उस समय के हर राजनेता के बयान ..

सवाल ये है कि क्या दारा सिंह का अभी नाम कोई लेगा जो लगभग उतने ही समय से उडीसा की जेल में बंद है . आखिर दारा सिंह के लिए ऐसी खबर कब आएगी जिसके माता पिता उसके जेल में रहते ही चल बसे हैं और उनकी अस्थियाँ अभी भी खेतों में गडी अपने अंतिम संस्कार की प्रतीक्षा कर रही हैं .. क्या मानवाधिकार आयोग या कैदियों की पैरवी करने वालों की लिस्ट में कहीं कोने में भी दारा सिंह का नाम है ये बहुत बड़ा सवाल है …


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