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बकरीद में पहली बार जारी हो रहे हैं इतने कड़े और बेहद जरूरी आदेश.. जानिए दिल्ली और मुबंई में क्या मिले हैं निर्देश

ये काफी समय बाद देखने को मिल रहा है जब सेकुलरिज्म के असली सिद्धांत अपनाए जा रहे हैं और किसी भी प्रकार की तुष्टिकरण को सीधे सीधे सिरे से ख़ारिज किया जा रहा है. कश्मीर की समस्या को जड से खत्म करने की मुहिम छेड़ने के बाद एक बार फिर नजर घुमाई गई है देश के अंदर के तमाम ऐसे मामलो पर जो अब तक हुआ करती थी सिरे से नजरंदाज .. आने वाले बकरीद पर इस बार सतर्क है दिल्ली और मुंबई का प्रशासन एकदम नए और बेहद जरूरी नियमो का कड़ाई से पालन करवाने के लिए .

ध्यान देने योग्य है कि इसकी शुरुआत योगीराज से हुई है जहाँ पहले तो अलीगढ़ के जिला प्रशासन ने सडको पर नमाज को पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया है तो वहीँ उसके बाद मेरठ में ऊँट की क़ुरबानी की अनुमति मांगने वालों को SSP अजय साहनी ने साफ़ साफ़ मना कर दिया और ऐसा करने पर कठोर कानूनी दंड की बात कही. उसी के बाद फिर मुंबई की अदालत ने एक बेहद जरूरी आदेश जारी किया और फिर उसी का अनुसरण दिल्ली के नगर निगम ने भी किया है जिसका हर तरफ स्वागत हो रहा है .

NGT के आदेशो का हवाला देते हुए उत्तरी दिल्ली नगर निगम ने आदेश जारी कर दिए हैं कि बकरीद पर जानवरों की क़ुरबानी देने के बाद उनके हाड मांस खाल आदि अपशिष्ट अवशेषों का निपटान वैज्ञानिक तरीके से करें जिस से किसी अन्य को असुविधा न हो . इन अवशेषों को इधर-उधर न फेंके। अगर ऐसा पाया गया तो एनजीटी के आदेशों के तहत जुर्माना लगाया जाएगा। बकरीद पर गंदगी फैलाने और जानवरों के अपशिष्ट नालियों में बहाने वालों के चालान काटे जाएंगे.

इस जुर्माने में पर्यावरण को प्रदूषित करने और यमुना में गंदगी फेंकने की सूरत में 5 हजार से लेकर 50 हजार रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है। आदेश में यह भी कहा गया कि जानवरों का खून सीधे यमुना में न जाए,. दिल्ली नगर निगम के इस आदेश का दिल्ली की जनता दिल खोल कर स्वागत कर रही है.. इस से पहले कई स्थानों पर बकरीद के बाद गंदगी का अम्बार दिखाई देता था जो इस बार न दिखने की उम्मीद जताई जा रही है . उधर मुंबई में भी ऐसे ही आदेश जारी किये गये हैं .

बॉम्बे हाईकोर्ट ने मंगलवार को बृहन्मुंबई महानगर पालिका (बीएमसी) को बकरीद पर आवासीय परिसरों में क़ुरबानी( पशु वध) इजाजत देने से इनकार कर दिया है। न्यायमूर्ति एससी धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति जीएस पटेल की पीठ ने कहा कि हालांकि इस पर पूरी तरह प्रतिबंध नहीं होगा। हाईकोर्ट ने कहा है कि इसके लिए धर्मस्थल के एक किलोमीटर के दायरे में स्थित आवासीय परिसर या सामुदायिक भवनों का वैकल्पिक तौर पर इस्तेमाल हो सकता है। हालांकि इसके बारे में बीएमसी का निर्देश लेना जरूरी होगा।

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