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अयोध्या मामले में बाबर की तरफ से श्रीराम के खिलाफ खड़ा हुआ है जो हिन्दू वकील उसको मिल रहे हैं बुजुर्गो से ऐसे संदेश


ये मामला हिन्दू समाज के आराध्य भगवान श्रीराम से जुड़ा हुआ है . यहाँ हिन्दुओ की आस्था जुडी हुई है और यहाँ किसी भी हाल में हिन्दू समाज जल्द से जल्द भव्य श्रीराम का मन्दिर देखना चाहता है . इतिहास में अगर झाँक कर देखा जाय तो भगवान श्रीराम की इस जन्मभूमि के लिए हिन्दुओं के अनगिनत बलिदान दिए हैं . पहले यहाँ के मन्दिर को बचाने के लिए और दुबारा यहाँ मन्दिर बनवाने के लिए कई बलिदान और आन्दोलन का गवाह रहा है अयोध्या .

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ऐसे में जब बाबर की तरफ से भगवान श्रीराम के खिलाफ खड़े वकील के बारे में सूचना लोगों के बीच में जा रही है तो कई लोग व्यथित और कई लोग आक्रोशित हो रहे हैं . यहा पर ये ध्यान रखने योग्य है कि श्रीराम के पक्ष में खड़े वकीलों में कोई भी मुस्लिम समुदाय से नहीं है जबकि बाबर की तरफ से खड़े वकीलों में हिन्दू हैं.. यद्दपि ये उन वकीलों का अपना पेशा होता है जिसकी बात आये दिन वो सार्वजानिक मंचो से स्वीकार भी किया करते हैं .. इन्ही वकीलों में से एक हैं एडवोकेट राजीव धवन ..

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अयोध्या मामले में बाबर पक्ष के वकील राजीव धवन ने सुप्रीम कोर्ट में दो लोगों के खिलाफ अवमानना याचिका दाखिल की है.  एक 88 साल के बुजुर्ग प्रोफेसर षणमुगम हैं, जिन्होंने उन्हें चिट्ठी लिख कर श्राप दिया है। दूसरे कोई संजय कलाल हैं जिन्होंने व्हाट्सऐप भेजा है कि आपके मरने पर राम नाम सत्य ही कहा जाएगा। याचिका तैयार करने में वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने मदद की है। इसमें ये भी लिखा है कि अवमानना याचिका दाखिल करने के लिए अटार्नी जनरल की ज़रूरी मंजूरी नहीं ली.

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उनके अनुसार अटार्नी जनरल वेणुगोपाल कभी अयोध्या केस में यूपी सरकार के वकील रह चुके हैं। चेन्नई के रहने वाले 88 साल के वृद्ध   प्रोफेसर ने लिखा है कि –  आप भगवान के काम में बाधा डाल रहे हैं। मैं श्राप देता हूं कि आपकी जीभ बोलना बंद कर दे। आपके पैर काम करना बंद कर दें, आपको दिखना बंद हो जाए और आपके कान सुनना बंद कर दें। धवन का कहना है कि ऐसा कहकर उन्होंने कोर्ट के काम में बाधा डाली है. फिलहाल वकील धवन को भेजे जा रहे ये संदेश चर्चा का विषय बने हुए हैं .

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