संविधान की कसम खाने वाले मंत्री ने कहा- “नहीं मानेंगे क़ानून, हम मुसलमान हैं.. हमारे लिए शरीयत ही पहले है”

जब वो मंत्री बनी तो उन्होंने शपथ ली थी कि वह संविधान का पालन करेंगे, संविधान को मानेंगे. इसके साथ ही वह उस पार्टी की सरकार के मंत्री हैं, जिस पार्टी की प्रमुख स्वयं को कथित सेक्यूलरिज्म की राजनीति का पुरोधा तथा संविधान के मूल्यों का सबसे बड़ा रक्षक मानती हैं. हम बात कर रहे हैं तृणमूल कांग्रेस प्रमुख तथा पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की जिनके एक मंत्री ने एलान कर दिया है कि वह तीन तलाक कानून नहीं मानेंगे. वह मुसलमान हो तो उनके लिए शरीयत से बड़ा कुछ भी नहीं है तथा वह शरीयत को ही मानेंगे.

तीन तलाक को लेकर पश्चिम बंगाल के पुस्तकालय विभाग के मंत्री व जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष सिद्दिकुल्ला चौधरी ने विवादित बयान देते हुए कहा है कि वह तीन तलाक बिल पास होना दुख का विषय है. यह इस्लाम पर हमला है. ममता के मंत्री सिद्दिकुल्ला चौधरी ने कहा कि हम तीन तलाक पर बने कानून को स्वीकार नहीं करेंगे. सिद्दीकुल्ला चौधरी ने कहा कि जब इस पर केंद्रीय कमिटी की मीटिंग होगी तो हम आगे की कार्रवाई पर विचार करेंगे. तीन तलाक के खिलाफ कानून को लेकर ममता के मंत्री इस विवादित बयान से आने वाले दिनों में राजनीतिक विवाद पैदा हो गया है तथा बीजेपी हमलावर हो गई है.

गौरतलब है कि विपक्ष के तमाम अवरोधों के बाद भी 30 जुलाई दिन मंगलवार को राज्यसभा ने तीन तलाक के खिलाफ विधेयक को मंजूरी दे दी थी और अब राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद यह देश में कानून के तौर पर लागू हो गया है. नये बने कानून में तीन तलाक बोलने के अपराधी को तीन साल की सजा का प्रावधान है. यही नहीं इसे संज्ञेय अपराध की श्रेणी में रखा गया है.

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