इंदिरा गांधी पर लगा अब तक का सबसे सनसनीखेज आरोप.. उन असहाय हिन्दुओं को लेकर जो सब कुछ लुटा और गंवा कर आये थे बांग्लादेश से

पूर्व प्रधानमन्त्री स्व. इंदिरा गांधी पर अब तक का सबसे बड़ा आरोप लगा है. इंदिरा गांधी पर ये आरोप उन असहाय हिन्दू शरणार्थियों को लेकर है जो बांग्लादेश मुक्ति युद्ध (1971) के दौरान उन्मादियों की प्रताड़ना से तंग आकर बंगलादेश से भारत आये थे तथा इन हिन्दुओं को   तत्कालीन प्रधानमन्त्री इंदिरा गांधी देश से  बाहर निकालना चाहती थी.

UNHRC की ‘द स्टेट ऑफ द वर्ल्ड रिफ्यूजीस- 2000’ की रिपोर्ट के अनुसार उस दौरान रोज करीब 1 लाख रिफ्यूजी भारत आ रहे थे. हालांकि भारत की सरकारी रिपोर्ट्स के अनुसार यह संख्या 10 हजार से 50 हजार थी. एफएल पिजनेकर होर्डिज्क, उस दौरान भारत में UNHRC के रिप्रजेंटेटिव थे, उन्होंने इस भयानक मानव त्रासदी से जुड़े डाटा जुटाए थे. 29 मार्च, 1971 में उन्होंने UNHRC के हेडक्वॉर्टर (जिनेवा) में एक मैसेज भेजा, जिसमें इस त्रासदी से जुड़े तमाम पक्षों को उजागर किया गया था. उनके इस संदेश के अनुसार, पिछले एक महीने में 10 लाख से ज्यादा बांग्लादेशी शरणार्थी भारत में शरण ले चुके थे. उनके इस तरह आने से भारत सरकार के सामने एक बड़ी समस्या पैदा हो गई थी.

उस वक्त इंदिरा गांधी की सरकार ने यह साफ किया था कि किसी भी कीमत पर उनकी सरकार रिफ्यूजियों को भारत में बसने नहीं देगी. हालांकि त्वरित मदद के लिए सरकार ने पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा और असम के बॉर्डर पर कई कैंप स्थापित किए थे.  एक इंटरव्यू में इंदिरा गांधी ने यह साफ किया था कि अचानक बड़ी संख्या में रिफ्यूजियों के आने से देश को बड़ी समस्या का सामना करना पड़ रहा है. उन्होंने कहा था कि पूर्वी बंगाल से जो शरणार्थी आ रहे हैं, हमारे लिए उन्हें अपने यहां रखना मुश्किल हो रहा है. पिछले कुछ महीनों से हम बर्दाश्त कर रहे हैं लेकिन अब पानी सिर के ऊपर जा चुका है. लेकिन एक बात मैं साफ कर दूं कि सभी धर्मों के शरणार्थियों को वापस जाना होगा. भारत उन्हें अपने में समाहित नहीं करेगा.

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