अब रेलवे स्टेशन पर होगा एयरपोर्ट वाला एहसास.. लागू होने जा रही है वो योजना जिससे पूरी तरह बदल जायेगी भारतीय रेलवे की दिशा और दशा

जल्द ही वो समय आने वाला है जब यात्रियों को रेलवे स्टेशन पर एयरपोर्ट जैसा एहसास होगा. एयरपोर्ट पर जिस तरह से यात्रियों को डिपार्चर से काफी पहले पहुँचने होता है, ठीक उसी तरह से रेलवे स्टेशन पर भी यात्रियों को समय से लगभग 20 मिनट पहले पहुंचना होगा. दरअसल भारतीय रेलवे कुछ इस तरह की योजनायें लागू करने जा रहा है, जिससे भारतीय रेलवे की दिशा और दशा पूरी तरह से बदल जायेगी.

खबर के मुताबिक़, रेलवे विभाग एयरपोर्ट के कुछ बेहद महत्वपूर्ण नियमों को रेलवे स्टेशनों में लागू करने जा रहा है। इन नियमों के मुताबिक ट्रेन के प्रस्थान होने के 15-20 मिनट के पहले रेलवे स्टेशन को सील (बंद) कर दिया जाएगा. ऐसे में अगर आप ट्रेन खुलने के 15 मिनट पहले प्लेटफॉर्म पर नहीं पहुंचे तो आपकी ट्रेन छूट भी सकती है. रेलवे सुरक्षा बल के महानिदेशक अरुण कुमार ने बताया कि उच्च तकनीक वाली इस सुरक्षा योजना को इस महीने शुरू हो रहे कुंभ मेला के मद्देनजर इलाहाबाद में और कर्नाटक के हुबली रेलवे स्टेशन पर पहले से ही शुरू कर दिया गया है. साथ ही 202 रेलवे स्टेशनों पर योजना को लागू करने के लिए खाका तैयार कर लिया गया है.

रेलवे सुरक्षा बल के महानिदेशक अरुण कुमार ने बताया कि जिस तरह से हवाई अड्डों पर सुरक्षा जांच होती है, ठीक उसी तरह से रेलवे स्टेशन पर भी सुरक्षा जांच होगी. उन्होंने बताया कि इस योजना के मुताबिक रेलवे स्टेशन को बंद कर दिया जाएगा. इसके मुताबिक स्टेशन पर कुछ भाग को परमानेंट बाउंड्री दीवार बनाकर सील कर दिया जाएगा जबकि कुछ हिस्से को आरपीएफ के नियंत्रण में रखा जाएगा. स्टेशन में हर प्वाइंट पर सिक्योरिटी चेकिंग होगी. इसके लिए एयरपोर्ट की तरह यात्रियों को स्टेशन पर अपनी ट्रेन के प्रस्थान के 15-20 मिनट पहले ही आ जाना होगा, क्योंकि इस बीच उन्हें सुरक्षा चेकिंग से भी गुजरना पड़ेगा.

अरुण कुमार ने बताया कि कुंभ के मद्देनजर प्रयागराज रेलवे स्टेशन पर तथा इसके अलावा कर्नाटक के हुबली रेलवे स्टेशन पर ये शुरू किया जा चुका है. उन्होंने बताया कि इसके लिए 202 अन्य रेलवे स्टेशन भी चिन्हित किये गये हैं जहाँ जल्द ही ये योजना लागू की जायेगी. उन्होंने बताया, ‘योजना रेलवे स्टेशनों को सील करने की है. यह मुख्यत: एंट्री प्वाइंट्स की पहचान करने और कितनों को बंद रखा जा सकता है यह निर्धारित करने के संबंध में है. कुछ इलाके हैं जिन्हें स्थायी सीमा दीवारें बनाकर बंद कर दिया जाएगा. अन्य पर आरपीएफ कर्मियों की तैनाती होगी और उसके बाद बचे बिंदुओं पर बंद हो सकने वाले गेट होंगे

अरुण कुमार ने बताया कि सुरक्षा बढ़ जाएगी, वहीं सुरक्षाकर्मियों की उपस्थिति कम हो जाएगी. अगर हम तकनीक को बढ़ा रहे हैं तो मैनपावर कम होगा. यह नियम इंटीग्रेटेड सिक्योरिटी सिस्टम योजना के तहत लागू किया जा रहा है. साल 2016 में ही इसे मंजूरी दे दी गई थी जिसमें कहा गया था कि 202 रेलवे स्टेशन पर इसे लागू किया जाएगा. इंटीग्रेटेड सिक्योरिटी सिस्टम (आईएसएस) के तहत स्टेशन के प्रवेश द्वार पर ही सीसीटीवी कैमरा, कंट्रोलिंग एक्सेस, पर्सनल बैगेज स्क्रीनिंग सिस्टम, बॉम्ब डिटेक्शन और डिस्पोजल सिस्टम होगा। आईएसएस योजना की कुल लागत 385.06 करोड़ बताई जा रही है. इसके अलावा रियल टाइम फेस रिकॉग्निशन (चेहरा पहचान) सॉफ्टवेयर चेकिंग से भी रेलवे यात्रियों को गुजरना पड़ेगा. इसकी मदद से किसी भी प्रकार के अपराधी पहचान वाले लोगों को लेकर आरपीएफ को अलर्ट किया जा सकेगा.


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