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देवबंद ने जारी किया फतवा- औरतों का मस्जिद में तरावीह पढ़ना गलत… मौन हो गये सबरीमाला पर चीखने वाले

तमाम कथित बुद्धिजीवी, फेमिनिस्ट तथा नारी स्वाभिमान के स्वघोषित ठेकेदारों ने धर्मनिरपेक्षता तथा संविधान की आड़ में केरल के पूज्य सबरीमाला मंदिर की पावनता तथा पवित्रता को भंग करने के लिए तमाम प्रयास किये तथा इसमें वो कामयाब भी रहे. हिन्दुओं की सनातनी आस्था को कुचलने के लिए न सिर्फ ये लोग बल्कि केरल की वामपंथी सरकार ने भी साजिशें रची तथा जिन धर्मावलंबी हिन्दुओं ने   सबरीमाला मंदिर की पवित्रता को बचाने का प्रयास किया था, उन पर केरल की वामपंथी सरकार ने जमकर कहर बरपाया तथा उनको अंतहीन प्रताड़नायें दी.

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लेकिन नारी स्वाभिमान, सम्मान, उनको बराबरी का हक़ देने की बात करने वाले ये बुद्धिजीवी तथा फेमिनिस्ट उस समय मौन हो गये हैं जब इस्लामिक तालीम केंद्र दारुल उलूम देवबंद के के एक फतवे में औरतों के रमजान माह की विशेष नमाज तरावीह की जमात करने और मस्जिद में तरावीह की नमाज पढ़ने को गलत बताया है. देवबंद के मुफ्तियों ने तर्क दिया कि ‘फर्ज नमाज के लिए औरतों को मस्जिद में जाने की ही इजाजत नहीं तो तरावीह के लिए इजाजत कैसे हो सकती है’.

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इस फैसले में देवबंद के मुफ्तियों ने साफ़ कर दिया है कि फर्ज नमाज के लिए औरतों को मस्जिद में जाने की इजाजत ही नहीं है. लेकिन देवबंद के इस फतवे पर वो लोग पता नहीं किस बिल में छिप गये हैं जो पूज्य सबरीमाला मंदिर में उन महिलाओं को प्रवेश कराने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाये थे, जिन्हें सनातनी परंपराओं का ज्ञान तक नहीं है. लेकिन अब कोई भी देवबंद के फतवे के खिलाफ जाकर मुस्लिम महिलाओं को फर्ज की नमाज के लिए मस्जिद में प्रवेश कराने के लिए आगे नहीं आ रहा है.

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बता दें कि एक व्यक्ति ने दारुल उलूम के मुफ्तियों से लिखित में सवाल किया था कि ‘विभिन्न स्थानों पर अलग-अलग तरीकों से औरतों की तरावीह की नमाज हो रही है. एक ही स्थान पर हाफिज को इमाम बनाकर औरतें नमाज-ए-तरावीह भी पड़ रही है, जबकि दूसरी जगह नाबालिगों को इमाम बनाकर तरावीह अदा की जा रही है. कई जगह घर के अंदर हाफिज साहब तरावीह पढ़ा रहे हैं, जिनके पीछे मर्द नमाज अदा कर रहे हैं. जबकि उसी घर के दूसरे कमरे में पर्दे के साथ महिलाएं तरावीह पढ़ रही है’.

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इस व्यक्ति द्वारा दारुल उलूम के मुफ्तियों से आगे पूछा गया कि इनमें से किस तरीके से महिलाओं का तरावीह की नमाज पढ़ना सही है. इस सवाल पर देवबंद के मुफ्तियों ने कहा कि ‘महिलाओं को तरावीह की नमाज घर के भीतर एकांत में अदा करनी चाहिए. इसके अलावा पूछे गए सभी तरीके बिल्कुल मना है, गैर इस्लामिक हैं.

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