महिलाओं पर फतवे जारी करने वाले देवबंद ने अब सरकार को दिखाई आँखें… बयान में सीधी चुनौती सत्ता को

तमाम जद्दोजहद तथा रुकावटों के बाद भी तीन तलाक को अपराध घोषित करने वाला बिल लोकसभा में पास हो गया. लोकसभा से तीन तलाक बिल पास होने के बाद जहाँ मुस्लिम महिलाओं में खुशी का माहौल है तथा वह इसके लिए केंद्र की मोदी सरकार का हार्दिक धन्यवाद कर रही है तो वहीं इस्लामिक शिक्षण संस्थान दारुल उलूम देवबंद ने इसे लेकर केंद्र सरकार को आँखें दिखाई है. वही देवबंद जो महिलाओं को लेकर तमाम तरह के फतवे जारी करता रहता है, उस देवबंद ने साफ़ कर दिया है कि उनके लिए शरीयत का क़ानून सबसे बड़ा है.

दारूल उलूम के कुलपति मुफ्ती अबुल कासिम नौमानी ने शुक्रवार को यहां जारी बयान में कहा हैं कि नरेन्द्र मोदी सरकार का यह कदम मुस्लिमों की धार्मिक आजादी में सीधा दखल है. उन्होंने कहा कि इस कानून से शरियत प्रभावित होती है जबकि मुसलमान शरियत के मुताबिक अपना जीवन गुजारना चाहते हैं. दारूल उलूम ने यह साफ कर दिया है कि देश के मुसलमान इस नए बनने वाले कानून को स्वीकार नहीं करेंगे. दारुल उलूम का मानना है कि तीन तलाक बिल पारित किया जाना सीधे तौर पर शरीयत में हस्तक्षेप है जिसे किसी कीमत पर मंजूर नहीं किया जाएगा.

ऑल इंडिया दावातुल मुसलिमीन के संरक्षक व प्रसिद्ध आलिम-ए-दीन कारी इस्हाक गोरा ने कहा कि लोकसभा में जो तीन तलाक बिल पेश किया गया वो मुसलमानों न पहले मंजूर था और न अब होगा. उन्होंने कहा कि मुसलमान कुरआन हदीस, अल्लाह और उसके रसूल के बताए रास्ते पर चलता आया है और उसी पर चलता रहेगा. यह खुल्लम खुला कुरआन हदीस और शरीयत में हस्तक्षेप है जिसे मुसलमान बर्दाश्त नहीं करेंगे. कारी इस्हाक गोरा ने कहा कि यह उन फिरकापरस्त ताकतों की जीत है जिन्होंने मुस्लिम महिलाओं को उलझा कर उनको गुमराह किया है.

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