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बलिदानी पति ने जंग जहाँ से रोकी थी, उनकी पत्नी से वहीं से की शुरुआत.. लेफ्टिनेंट बनी जांबाज की पत्नी

पति ने देश के लिए अपनी जान दे दी तो पत्नी ने संकल्प लिया कि देश की रक्षार्थ जिस जंग को उसके पति अधूरा छोड़ गये हैं, उसे वह पूरा करेगी. तमाम कठिनाइयों तथा मुश्किलों से लड़ते हुए जांबाज की पत्नी ने आपने संकल्प को पूरा किया तथा आज वह सेना में लेफ्टिनेंट है.  हम बात कर रहे हैं शहीद  रविंदर संब्याल की पत्नी नीरू संब्याल की जिन्होंने अपने पति की मौत के बाद भी हिम्मत नहीं हारी और लड़ी अपने परिवार तथा अपनी बेटी के लिए, जिसने मजबूत संकल्प व अदभ्य ताकत को प्रदर्शित किया और अपने पति के ख्याबों को पूरा करते हुए, सेना में शामिल हो गई हैं. उन्होंने सफलापूर्वक अपना सैन्य प्रशिक्षण पूरा किया और अब वे भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट के रूप में शामिल हो गई हैं.

आपको बता दें कि नीरू के पति राइफलमैन रविंदर संब्याल 2 मई, 2015 को अपनी रेजिमेंट के साथ एक ड्रिल के दौरान शहीद हो गए थे. नीरू और रविंदर की शादी अप्रैल 2013 में हुई थी और दोनों की दो साल की एक बेटी है. जब नीरू ने बेटी को जन्म दिया, तो उनके पति इस दुनिया को छोड़कर जा चुके थे. नीरू ने तब ही ठान लिया था कि वे अपने पति के सपनों को पूरा करेंगी और इसलिए उन्होंने सेना में दाखिल होने का फैसला लिया. नीरू ने चेन्नई के ऑफिसर ट्रेनिंग अकेडमी के नए बैच में कई सैन्य अधिकारियों के साथ प्रशिक्षण लिया और आज वे सेना में लेफ्टिनेंट हैं. अपने संघर्षों के दिनों को याद करते हुए नीरू बताती हैं, ‘मेरी और राइफलमैन रविंदर सिंह संब्याल की साल 2013 में शादी हुई थी. रविंदर इंफ्रैट्री में थे. जब मुझे उनके शहीद होने की खबर मिली, तो मुझे बिल्कुल भी यकीन नहीं हुआ था कि ऐसा हो गया है. लेकिन मेरी बेटी मेरे लिए प्रेरणा का स्त्रोत बनी. मैं कभी नहीं चाहती थी कि उसे अपने पिता की कमी महसूस हो. मैं उसकी इच्छाओं और सपनों को पूरा करने लिए पिता और माता दोनों का रोल अदा करना चाहती थी. इसी प्रेरणा की बदौलत मैंने 49 हफ्तों की ट्रेनिंग पूरी की. 8 सिंतबर, 2018 को मुझे सेना में नियुक्ति मिल गई.’

सेना में शामिल होने पर उन्होंने कहा, ‘सेना में होने के नाते मानसिक रूप से मजबूत होना चाहिए, क्योंकि ऐसा भी समय आता है जब किसी को ऐसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है जहां शारीरिक शक्ति अधिक मायने नहीं रखती नहीं है.’ नीरू ने बताया कि हर फैसले में उन्हें उनके परिवार का पूरा साथ और समर्थन मिला है। उन्होंने बताया कि उनके ससुराल और मायके वालों ने उनके सपने को पूरा करने लिए उनकी हरसंभव मदद की. नीरू ने बताया कि उनके पति उन्हें हमेशा राष्ट्र के लिए कुछ न कुछ करते रहने के लिए प्रेरित करते रहते थे. यही कारण है कि जब वह शहीद हुए तभी मैंने संकल्प लिया था कि देश का कर्ज अभी उन पर बाकी है तथा जिस जंग को उसके पति अधूरा छोड़ गये हैं, उसे वह सेना में जाकर पूरा करेगी और आज उसके संकल्प तथा सपने की जीत हुई है.

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