जिस मिग के क्रैश होने के बाद राष्ट्रनायक अभिनंदन चला गया नापाक कैद में, उसी मिग को हटाकर आने वाला था राफेल.. अभिनंदन का गुनेहगार पाकिस्तान, लेकिन राफेल का गुनेहगार कौन ?

पाकिस्तान में घुसकर भारतीय वायुसेना की एयर स्ट्राइक से बौखलाए पाकिस्तान के लड़ाकू विमानों ने आज भारतीय सीमा में घुसपैठ की कोशिश की. पहले से अलर्ट पर भारतीय वायुसेना ने इसका जवाब दिया. भारत की तरफ से MIG-21 ने पाकिस्तानी लड़ाकू विमान F-16 को जवाब देने के लिए उड़ा भरी तथा उसको मार गिराया. लेकिन अफ़सोस इसके बाद हमारा MIG-21 क्रैश हो गया. हमारे MIG-21 विमान को उड़ा रहे थे इंडियन एयरफोर्स के विंग कमांडर अभिनंदन. इसके बाद पाकिस्तान ने दावा किया कि विंग कमांडर अभिनंदन उसके कब्जे में हैं. बाद में भारतीय विदेश मंत्रालय ने बताया कि हमारा एक पायलट लापता है.

विंग कमांडर अभिन्दन कहाँ है तथा उनको कैसे वापस लाया जायेगा, इसके लिए हमें अपनी सरकार के अगले कदम का इन्तजार करना होगा. यहां सवाल ये है कि आखिर पाकिस्तान के F-16 से मुकाबले के लिए MIG-21 को क्यों उतारना पड़ा? MIG-21 भारत का बेहद की पुराना विमान है जो वर्तमान हालातों में बेहद ही कमजोर माना जाता है. अक्सर MIG-21 के क्रैश होने की खबरें आती रहती हैं. यहाँ ये भी बता दें कि इसी MIG-21 की जगह भारत सरकार राफेल को लेकर आ रही है. भारत सरकार को पता है कि विपरीत परिस्थितियों में मिग-21 धोखा दे सकता है, इसलिए सरकार ने फ़्रांस से राफेल विमान डील की.

वही राफेल डील..जिसे लेकर कांग्रेस सहित संपूर्ण विपक्ष पिछले कुछ समय से जबरदस्त हंगामा मचाये जा रहा है. जब देश में कांग्रेस की सरकार रही तब वायुसेना की मांग के बाद भी राफेल डील को अमलीजामा नहीं पहिनाया जा सका. इसके बाद जब मोदी सरकार ने फ्रांस से राफेल डील की तो अपने राजनैतिक फायदे के लिए कांग्रेस तथा विपक्षी राफेल डील के खिलाफ तनकर खड़े हो गये. विपक्ष पूरी तरह इस कोशिश में लगा रहा कि राफेल डील न हो. जबकि विपक्ष अच्छी तरह से जानता है कि राफेल के आने से भारतीय वायुसेना मजबूत होगी लेकिन वह अपने फायदे के लिए वायुसेना को मजबूत नहीं होने देना चाहता. यही कारण है कि न चाहते हुए भी भारतीय वायुसेना को मिग-21 ला उपयोग करना पड़ रहा है.

पूरे देश ने देखा है कि राफेल डील को खटाई में डालने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने किस तरह से संसद से लेकर सड़क तक हंगामा किया. ऐसी ऐसी जानकारियाँ लीक की गईं जो किसी देश की सुरक्षा तथा दूसरे देश से संबंधों के लिहाज से बेहद ही अहम् होती हैं. एकतरफ केंद्र की मोदी सरकार थी जो देश तथा वायुसेना को सशक्त बनाने के लिए राफेल लाने को प्रतिबद्ध थी तो दूसरी तरफ विपक्ष था जिसे ने तो देश की चिंता थी और न ही वायुसेना की. विपक्ष को चिंता थी तो केवल अपनी स्वार्थी राजनीति की, जिसके लिए वह किसी भी हालत में राफेल डील रोकने पर आमादा था. विपक्ष राफेल डील को रोकने के लिए एक के बाद एक रोड़े अटकाता रहा. हालाँकि अब भारत और फ़्रांस के बीच 36 राफेल विमानों की डील फाइनल हो चुकी है लेकिन इसके बाद भी विपक्ष के कुछ प्यादे इस डील के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में तनकर खड़े हुए हैं.

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