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2012 में आज ही स्थापित हुई थी वो “आप पार्टी” जिसके सदस्य हैं सोमनाथ भारती जैसे असभ्य, गाजीबाज़, महिला विरोधी विधायक और इन सबको संरक्षण देने वाले अरविंद केजरीवाल

कुछ समय बाद ही वन्देमातरम बोलने वालों को वही शब्द साम्प्रदायिक लगने लगा और वही कहने लगे कि इसको बोलने के लिए किसी को बाध्य न किया जाय .. अब बारी थी भारत माता की जय के नारों की, जिसके जवाब में दिल्ली की ही एक यूनिवर्सिटी में भारत तेरे टुकड़े होंगे जैसे नारे लगाए गए..उनके समर्थन में देखा गया केजरीवाल एन्ड टीम के कुछ सदस्यों को .. इतना ही नहीं, अवैध बंगलादेशी व घुसपैठी रोहिंग्या के लिए इन्ही के आधार में रहे लोगों को अदालतों में मुकदमे आदि लड़ते देखे आम जनता ने .. ये वेटिकन तक श्रद्धा से चले गये थे लेकिन काशी गए तो मात्र मोदी के विरोध में चुनाव लड़ने ..खुद बता कर आये थे कि दिल्ली की जनता गरीब है और वो उसकी गरीबी दूर केरेगें लेकिन उसी जनता से ये लगातार चंदा मांगते और लेते भी रहे ..

2012 का समय था वो.. सामने अन्ना हज़ारे हुआ करते थे.. लेकिन अब वो नही हैं.. कपिल मिश्रा, योगेंद्र यादव, कुमार विश्वास , भूषण भी नहीं दिख रहे हैं अब उस टीम में क्योंकि इन सबके साथ किया गया सुलूक सबको याद है .. नारी के सबसे चर्चित चेहरे के रूप में शाज़िया इल्मी भी अब नही हैं क्योंकि उन्हें दी गयी अंतहीन प्रताड़ना .. अब तो ये हालात हैं कि सचिवालय के अंदर मार पीट , IAS अधिकारियों पर हमले, किसी को भी न बोलने देना, बोलने पर उसको धंधे वाली तक कह देना.. ऑटो वालों को प्रताड़ना देना , बंगलदेशियो को संरक्षण देने .. और भी न जाने क्या क्या .. जी हां, ये नया रूप है उस आप पार्टी का जो आज के ही दिन 2012 में बदलती राजनीति का नाम ले कर स्थापित हुई थी.

इसी बीच इन्होंने 2 नेताओं को सबसे ज्यादा प्रोत्साहित किया ..पहले अमानतुल्लाह खान और दूसरे सोमनाथ भारती .. एक का प्रयोग अपनी पार्टी के बागियों व केजरीवाल की हां में हाँ न मिलाने वालों को मारने पीटने के लिए व दूसरे को छोड़ दिया गया महिलाओं को प्रताड़ित करने के लिए ..आम आदमी पार्टी के जिस भी पूर्व नेता को बेइज्जत किया गया उसमें अमानतुल्लाह का नाम जरूर आया और घर की महिला हो या न्यूज की एंकर उसके खिलाफ प्रताड़ना में सोमनाथ भारती सबसे अव्वल रहे .. फिर भी ये दोनों केजरीवाल की आंखों के तारे बने रहे ..इसी के साथ विदेशी मामलो में भी भारत सरकार की बेइज्जती करवाना जिसमे सर्जिकल स्ट्राइक का सबूत मांगना और सेना को अपमानित करने की कोशिश करना, पुलिस की अथक कोशिशों से पकड़े गए शहरी नक्सलियों को परोक्ष रूप से सही बताना, खालिस्तानियों के घर पर रुकना , कश्मीरी पत्थरबाजों के खिलाफ खामोश रहना, बटला हाउस के मुठभेड़ पर सवाल उठाना आदि ऐसे मामले सामने आए जिस से लगा कि ये राजनीति नही बल्कि राष्ट्र की ही नीति तो बदलने की कोशिश नही कर रहे ? ध्यान ये भी रखने योग्य है कि इसी बीच ये बलिदानी व समाज के रक्षक पुलिस वालों को ठुल्ला आदि अपमानजनक शब्द बोलते रहे .. हर कोई जानने की कोशिश कर रहा कि ये कैसी राजनीति ? और इस से देश का क्या भला होगा ?

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