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जिस पवित्र रामायण को बाबर के तरफदारों ने अदालत में बताया था काल्पनिक, उसी रामायण का असल स्वरुप दुनिया को बताया गृहमंत्री अमित शाह जी ने

इसी पवित्र ग्रन्थ के ऊपर अभी हाल में अदालत में उँगलियाँ उठाई गई थी और बाबर की पैरवी करने वालों ने इसको एक काल्पनिक काव्य बता डाला था.. इतना ही नहीं ये पवित्र ग्रन्थ जिन प्रभु श्रीराम के ऊपर है उनके खिलाफ भी कई ऐसी बातें की जो अक्षम्य ही कही जायेंगी धार्मिक दृष्टिकोण से.. उस समय आशा की जा रही थी कि तमाम साधू संत इसका विरोध कर के रामायण और श्रीराम की महानता को न सिर्फ मुस्लिम पक्ष बल्कि अदालत तक को बताएँगे .. लेकिन ऐसा नहीं हुआ .

रामायण हिन्दुओ का वो पवित्र ग्रन्थ है जो मानवता की रक्षा में एक मील का पत्थर कहा जा सकता है . इसको पढ़ कर जाना जा सकता है कि भगवान श्रीराम को उनके किन गुणों के चलते मर्यादा पुरुषोत्तम कहा जाता है . यद्दपि आख़िरकार परोक्ष रूप से ही सही पर रामायण और श्रीराम के शत्रुओं को भारत के केन्द्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह ने दिया है अपने अंदाज़ में जवाब और खामोश कर दिया है इस पावन ग्रन्थ पर उंगलियाँ उठाने वालों को अपने वक्तव्य से ..

मंगलवार को दिल्ली में 5वें अंतरराष्ट्रीय रामायण महोत्सव में अमित शाह जी के रामायण और श्रीराम पर दिए वक्तव्य ने हिन्दुओ को एक नई चेतना जैसी दी है . अमित शाह ने कहा, ‘हमने बहुत साल से रामायण मंचन कार्यक्रम नहीं देखा इसलिए यहां ये मंचन देखने आए हैं. रामायण को सभी ने मंच पर मंचित करने का प्रयास किया है. देश की सीमाओं को लांघते हुए, रामायण पूर्ण महाकाव्य है. इस पूरे महाकाव्य में रामायण में महर्षि वाल्मीकि ने सारे जीवन चरित्र का वर्णन किया है.

केन्द्रीय गृहमंत्री ने इसके आगे भी जोड़ा और अपने वक्तव्य को जारी रखा .. उन्होंने कहा कि संसार की सारी समस्याओं का समाधान हमें केवल रामायण में मिल सकता है. रामायण भारतीय संस्कृति का राजदूत बनकर अनेकानेक देशों के अंदर भाषाओं की मर्यादा और धर्म की मर्यादाओं को भी परास्त करते हुए पहुंचा है. शायद ही दुनिया की कोई ऐसी भाषा होगी जिसमें रामायण का अनुवाद न हुआ हो. ये सब सुन कर सभागार में हर कोई भक्तिभाव से विह्वल दिखाई दे रहा था .

रामायण सिर्फ आर्दश जीवन को समझाने वाला काव्य नहीं है, बल्कि इसमें कई ऐसे संवाद हैं जो नीति शास्त्र का, सुशासन का, युद्ध शास्त्र का और ज्ञान व विज्ञान का भी परिचय देते हैं. अमित शाह जी ने इसके आगे भी अपने शब्द जोड़े और कहा कि . प्रभु श्रीराम मर्यादा पुरुषोत्तम थे जिससे उनका पूरा जीवन चरित्र उजागर होता है, रामायण में कई ऐसे काव्य हैं जो ग्यान विग्यान, सुशासन सबका वर्णन करते हैं. स्त्री की मर्यादा कैसे रखी जाती है उसका रामायण में वर्णन हैं, स्त्री की मर्यादा के लिए युद्ध उचित है तो होना ही चाहिए..

 

 

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