कुव्वत उल इस्लाम मस्जिद किस मंदिर को तोड़कर बनाई गई अब इसका भी हुआ खुलासा


अयोध्या में श्रीराम मंदिर मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई पूरी हो चुकी है तथा कोर्ट इस पर कभी भी फैसला सुना सकता है. इस समय पूरे देश की नजरें अयोध्या श्रीराम मंदिर मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट पर ही टिकी हुई हैं लेकिन इस बीच एक ऐसी मस्जिद सामने आई है जो एक नहीं बल्कि कई मंदिरों को तोड़कर बनाई गई थी. ये मस्जिद कहीं और नहीं बल्कि देश की राजधानी दिल्ली में कुतुबमीनार परिसर में स्थित कुव्वत-उल इस्लाम मस्जिद है.

कुव्वत-उल इस्लाम मस्जिद के स्तंभों पर लगी देवी-देवताओं की खंडित मूर्तियां और मंदिरों जैसी इसकी नक्काशी यह गवाही दे रही है कि मंदिरों को तोड़कर इसे बनाया गया था. ASI के पूर्व निदेशक डॉ. के के मुहम्मद के मुताबिक, कुतुबमीनार स्थित कुव्वत-उल इस्लाम मस्जिद 27 हिंदू व जैन मंदिरों को तोड़कर बनाई गई है. मस्जिद के पिछले हिस्से में नाली के ऊपर लगी एक मूर्ति को लेकर यहां पूर्व में विवाद भी हो चुका है. जिसके बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने लोहे के जाल से मूर्ति को ढक दिया है. यही नहीं मस्जिद के आसपास के क्षतिग्रस्त भाग से मूर्तियां भी निकली हैं.

पुरातात्विक दस्तावेजों में साफ तौर पर वर्णित है कि कुतुबुद्दीन ऐबक ने 27 हिंदू व जैन मंदिरों को तोड़कर इस मस्जिद का निर्माण करवाया था. इन्हीं मंदिरों के नक्काशीदार स्तंभों और अन्य वास्तुकला संबंधी खंडों से इसका निर्माण कराए जाने का दावा इतिहासकार करते हैं. इसके स्तंभों पर आज भी देवी-देवताओं की मूर्तियां देखी जा सकती हैं. इस मस्जिद का काफी हिस्सा ढह चुका है, मगर मस्जिद का जो हिस्सा शेष बचा है वह पर्यटकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करता है. इसमें अधिकतर मूर्तियों को क्षतिग्रस्त किया जा चुका है.

कहा जाता है कि इन्हें इसलिए क्षतिग्रस्त कर दिया गया था, ताकि लोग यहां पूजा पाठ करना न करें. देवी देवताओं की इन मूर्तियों को लेकर कुछ साल पहले विवाद भी हो चुका है. उस समय कई हिंदू संगठन यहां पूजा-अर्चना करने पहुंच गए थे. उनकी सबसे अधिक आपत्ति इस मस्जिद के पीछे के भाग में लगी मूर्ति को लेकर थी. जिसे एक नाली के ऊपर लगाया गया है. इसके बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) ने इस मूर्ति के ऊपर लोहे का मोटा जाल लगवा दिया है.

एएसआइ के पूर्व निदेशक डॉ. केके मुहम्मद ने भी अयोध्या मसले पर चर्चा के दौरान इस मस्जिद का जिक्र किया था. उनका कहना था कि अयोध्या में विवादित ढांचे के हालात भी दिल्ली स्थित कुव्वत-उल इस्लाम मस्जिद की तरह हैं. डॉ. के के मुहम्मद के मुताबिक, यह बात सही है कि कुतुबमीनार स्थित कुव्वत-उल इस्लाम मस्जिद 27 हिंदू व जैन मंदिरों को तोड़कर बनाई गई है. पुराने समय में कुछ गलतियां हुई हैं, लेकिन इसके लिए आज के मुस्लिम जिम्मेदार नहीं हैं.

ASI के पूर्व निदेशक डॉ. के के मोहम्मद ने बताया है कि उन्होंने अयोध्या अयोध्या श्रीराम मंदिर मामले में बाबरी मस्जिद के बारे में दिए बयान में भी मैंने इस मस्जिद का जिक्र अपनी बात को सही तरह से समझाने के संदर्भ में किया है. पूर्व में इस स्तंभ के ऊपर प्लास्टर किया गया था, जो अब उतर गया है. कुतुबमीनार के पास ही एक चारदीवारी भी क्षतिग्रस्त हुई है. उसमें पत्थर की मूर्ति निकली है, जिसे वहीं रखवा दिया गया है.

पुरातात्विक अभिलेखों के मुताबिक चार सौ वीं शताब्दी में राजा अनंगपाल यहां विष्णु पर्वत से विभिन्न धातु के बने विष्णु स्तंभ लेकर आए थे, जो आज भी इसी परिसर में स्थित हैं. इस स्तंभ पर गुप्तकाल की लिपि में संस्कृत में एक लेख है. जिसे पुरालेखीय दृष्टि से चतुर्थ शताब्दी का निर्धारित किया गया है. हिंदू संगठनों का दावा है कि जहां मस्जिद है, यहां पर भी पूर्व में मंदिर था. विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. विनोद बंसल कहते हैं कि यह पहला स्थान नहीं है, जहां मंदिर था. देश में 30 हजार ऐसे हिंदू स्थान हैं, जिन्हें तोड़कर मुस्लिम मान्यताओं को मानने वालों के केंद्र बनाए गए हैं. यह सब पूर्व के शासकों द्वारा हिंदुओं को दी गई पीड़ा है.


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