Breaking News:

न्यायप्रिय व कर्तव्यनिष्ठा की मिशाल हैं नये अंतरिम CBI चीफ श्री नागेश्वर राव… जानिये उनके बारे में जो करेगा आपको भी गौरवान्वित

सीबीआई के डायरेक्टर आलोक वर्मा और स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना को एक-दूसरे पर भ्रष्टाचार के आरोपों की जाँच होने तक अवकाश पर भेजे जाने के बाद एम नागेश्वर राव को जाँच एजेंसी की कमान सौंपी गई है. पिछले बुधवार को जारी एक सरकारी बयान में कहा गया है कि नागेश्वर राव को आरोपों की जाँच पूरी होने तक सीबीआई का अंतरिम निदेशक नियुक्त किया गया है. मूल रूप से तेलंगाना के जयशंकर भूपालपल्ली ज़िले के रहने वाले एम नागेश्वर राव  को उनकी कर्तव्यनिष्ठा और ईमानदारी के लिए जाना जाता है. यही कारण  रहा कि सीबीआई में उत्पन हुआ तनाव के बाद एम् नागेश्वर राव को सीबीआई की कमान सौंपी गयी  है.

नागेश्वर राव ने 1981 में ओस्मानिया यूनिवर्सिटी से केमिस्ट्री में परास्नातक की शिक्षा प्राप्त की. इसके अलावा वह आईआईटी मद्रास के भी छात्र रह चुके हैं. नागेश्वर राव 1986 में भारतीय पुलिस सेवा यानी आईपीएस के लिए चुने गए. उन्होंने ओडिशा पुलिस में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक की ज़िम्मेदारी संभाली और बाद में चेन्नई क्षेत्र के सीबीआई के प्रमुख रहे. राव को राष्ट्रपति पदक, विशिष्ट सेवा पदक और ओडिशा सरकार के पदक से सम्मानित किया गया है. नागेश्वर राव को बीफ़ निर्यात के सख्त ख़िलाफ़ माना जाता है. साथ ही उन्हें हिंदुओं के सांस्कृतिक दबदबे का हिमायती भी माना जाता है.

नागेश्वर राव को करीब से जानने वाले बताते हैं कि मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से बाहर करने, अल्पसंख्यकों को पक्ष लेने वाले और हिंदुओं से भेदभाव करने वाले क़ानूनों को रद्द कराने और बीफ़ एक्सपोर्ट पर रोक लगाने पर ज़ोर देने वाले संगठनों के साथ राव काम करते रहे हैं. नागेश्वर राव ओडिशा के ऐसे पहले पुलिस अधिकारी थे, जिन्होंने बलात्कार मामले का पता लगाने के लिए जांच में डीएनए फिंगर प्रिंटिंग तकनीक का इस्तेमाल किया था. साल 1996 में जगतसिंहपुर जिले में हुआ यह मामला 7 साल तक चला था और आखिरकार वो आरोपी को सजा दिलाने में सफल रहे थे.

एम नागेश्वर राव को तेज-तर्रार और शख्त अधिकारी के रुप में जाना जाता है. राव ने ओडिशा में अपनी पहली पोस्टिंग के दौरान ही अवैध खनन के लिए बदनाम तलचर में अपराध पर लगाम लगाकर खास पहचान बनाई थी. इसके अलावा उन्होंने मणिपुर में विद्रोही गतिविधियों पर भी लगाम लगाई थी. यहां वो सीआरपीएफ के डीआईजी (ऑपरेशंस) के रूप में तैनात थे.  ओडिशा पुलिस में राव को क्राइसिस मैनेजर के रूप में याद किया जाता है. वह अपनी बेहतरीन और विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति पुलिस मेडल, विशेष कर्तव्य मेडल और ओडिशा गवर्नर मेडल पा चुके हैं. इसके अलावा साल 2014 में भी ओडिशा और आंध्र प्रदेश में आए चक्रवाती तूफान हुदहुद से निपटने में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, जिसके लिए उन्हें सीएम पुरस्कार और 5 लाख रुपये नकद पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया था.

Share This Post