जो उसे गरीब फलवाला समझ कर फल खरीदते थे, उन्हें भी नहीं पता था कि वो था एक दुर्दांत आतंकी जिसे अथाह नफरत थी हिन्दू और हिन्दुस्थान से

वो फल बेचता था तथा लोग उसे गरीब फलवाला समझ कर उससे फल खरीदते थे. लेकिन शायद वो नहीं जानते थे कि जिसे वह गरीब फलवाला समझ रहे हैं तथा उससे फल खरीद रहे हैं वो गरीब नहीं है बल्कि दुर्दांत इस्लामिक आतंकी है जो हिन्दुस्थान को तबाह करने के नापाक मंसूबे पाले हुए है. हम बात कर रहे हैं हाल ही में स्पेशल सेल द्वारा जम्मू कश्मीर के श्रीनगर से गिरफ्तार किये जैश-ए-मोहम्मद के आंतकी बशीर अहमद के बारे में. मुखबिर की सूचना पर स्पेशल सेल ने मंगलवार को बसीर अहमद को गिरफ्तार किया था.

आतंकी बसीर अहमद के बारे में जानकारी मिली है कि वर्ष 2013 से वह फरार चल रहा था. सोमवार को सेल की टीम ने उसे श्रीनगर के कोठीबाग इलाके से गिरफ्तार किया. स्पेशल सेल की टीम ने बशीर के दो अन्य साथियों फैयाज अहमद लोन और अब्दुल मजीद बाबा को इसी साल मार्च और मई में गिरफ्तार किया था. तब से बशीर अपनी गिरफ्तारी से बचने के लिए अपना ठिकाना बदल रहा था. उस   पर दिल्ली पुलिस ने 2 लाख रूपये का इनाम घोषित कर रखा था.

इस्लामिक आतंकी बशीर अहमद के बारे में जानकारी मिली है कि वह पहले फल बेचता था, फिर आतंकी बन गया. स्पेशल सेल के डीसीपी संजीव कुमार ने बताया कि बशीर साल 2007 में भी दिल्ली पुलिस के साथ मुठभेड़ के दौरान गिरफ्तार हुआ था. लेकिन मुकदमा चलने के बाद निचली अदालत से बरी हो गया. उसके बाद उसे दिल्ली हाई कोर्ट से सजा सुनाई गई. कुछ सालों बाद इस मामले में जमानत मिलने के बाद बशीर कोर्ट में पेश नहीं हो रहा था. कई बार पेशी से नदारद रहने पर कोर्ट ने उसके खिलाफ गैरजमानती वारंट तक जारी किया था. बशीर की गिरफ्तारी पर पुलिस ने दो लाख रुपए का ईनाम घोषित कर रखा था.

इसके बाद से ही स्पेशल सेल की एक टीम कश्मीर में डेरा डाले हुए थी. 25 मार्च को बशीर के साथी फैय्याज को श्रीनगर से पकड़ा गया और फिर 11 मई को अब्दुल मजीद को भी श्रीनगर से दबोच लिया गया. इसके बाद से बशीर भागा भागा फिर रहा था. 1992 में बशीर ने बीएसएफ के आगे समर्पण कर दिया था लेकिन साल 2002 में वह जैश-ए-मोहम्मद के एक आतंकवादी गुलाम रसूल डोथू के कहने पर जैश में शामिल हो गया और आतंकवादी वारदात को अंजाम देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. वह हवाला के जरिए रकम भी पाता था और अपने आकाओं के पास पहुंचाने का काम करता था.

साल 2007 में गिरफ्तारी के पहले वह रेहड़ी पर फल बेचा करता था. साल 1990 में जब आतंकी घाटी को अपना ठिकाना बना रहे थे, तब बशीर हिज्बुल मुजाहिद्दीन में शामिल हो गया. पाक अधिकृत कश्मीर में प्रशिक्षण लेने के बाद उसे हथियार और गोला बारूद मिलने लगा. डीसीपी के मुताबिक फरवरी 2007 में दिल्ली पुलिस ने बशीर अहमद, फैयाज अहमद लोन और अब्दुल मजीद बाबा को एक पाकिस्तानी आतंकी शाहिद गफूर के संग दीनदयाल उपाध्याय मार्ग पर पकड़ा था. ये लोग दिल्ली में बड़ी साजिश को अंजाम देना चाहते थे. 7 अगस्त 2013 में दिल्ली की एक अदालत ने शाहिद गफूर को सजा सुनाई और बशीर, फैयाज व अब्दुल मजीद को बरी कर दिया. इसके बाद दिल्ली पुलिस ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी. हाईकोर्ट ने बशीर, फैयाज व अब्दुल मजीद को भी दोषी करार देते हुए सजा सुनाई लेकिन ये तीनों फरार हो गए थे.

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