वेदों, पुराणों के साथ पवित्र परिक्रमा तक को क्या क्या कहा गया अदालत में.. हिन्दुओ को बता दिया गया अपने श्रीराम के मन्दिर के “घुसपैठिये”


कुछ समय पहले की ही बात है जब सुप्रीम कोर्ट में तीन तलाक का मामला चल रहा था . उस समय सुप्रीम कोर्ट तक में कहा गया था कि अगर तीन तलाक कुरआन में मिलता है तो उसको लागू किया जाय.. इतना ही नहीं , ये वही अदालत है जहाँ पर आज भी गीता पर हाथ रख कर कसम खाने की परम्परा है.. लेकिन इसके बाद भी उसी अदालत में मुस्लिम पक्षकारों ने जिस प्रकार से हिन्दू आस्था पर सवाल उठाया वो भारत के सेकुलर समाज के लिए विचार का विषय है और मंथन का भी ..

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बाबरी के पक्षकारों ने तो हिन्दुओ को अपने ही आराध्य के मन्दिर में घुसपैठी करार दे डाला . बाबरी के पक्षकार ने बहस के दौरान कहा कि- 1934 में हिंदुओं ने बाबरी मस्जिद पर हमला किया, फिर 1949 में अवैध तरीके से घुसपैठ की और आखिर साल 1992 में इसे ध्वस्त कर दिया। अब कह रहे हैं कि संबंधित जमीन पर उनके अधिकार की रक्षा की जानी चाहिए। हद तो ये हो गई कि मुस्लिम पक्षकार ने कहा कि वैदिक काल में मन्दिर की परम्परा थी ही नहीं जबकि उस काल के कई भव्य मन्दिरों के अवशेष अभी भी मिल जाया करते हैं .

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मुस्लिम पक्षकार के वकील ने कहा कि स्वयंभू का मतलब भगवान का प्रकट होना होता है, इसको किसी खास जगह से जोड़ा नहीं जा सकता है। हम स्वयंभू और परिक्रमा के दस्तावेजों पर भरोसा नहीं कर सकते हैं.. रामायण काव्य है क्योंकि वाल्मिकि ने खुद इसे काव्य और कल्पना से लिखा है। रामायण तो राम और उनके भाइयों की कहानी है। तुलसीदास ने भी मस्जिद के बारे में कुछ नहीं लिखा है जबकि उन्होंने राम के बारे में सबसे बाद में लिखा है।

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