भारत में छुआछूत किस की देन है आख़िरकार बता ही दिया RSS के वरिष्ठ पदाधिकारी ने…दिए वो अकाट्य प्रमाण जिसको छिपा गये थे वामपंथी इतिहासकार


वामपंथी विचारधारा के जिन लोगों ने साजिश कर के हिन्दू समाज में ही तमाम कमियों को जोड़ कर धर्म को बदनाम करने की कोशिश की थी उस से विचारधारा को उबारने की कोशिश इस से पहले भी राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ करता रहा है और अब एक नये बयान के बाद सामने लाने की कोशिश की गई है एक ऐसी अवधारणा के प्रतिकार को जिसको वर्षो से थोपा गया है हिन्दू समाज के ऊपर.. संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी के बयान के बाद अब एक बार फिर से सच की खोज तेज हो गई है .

विदित हो कि छुआछूत की परम्परा से लड़ने की बात खुद गांधी कह चुके थे और उनके अनुसार छुआछूत समाज से खत्म होनी चाहिए थी लेकिन उसको शुरू किस ने किया इस पर कभी इस से पहले प्रकाश नहीं डाला .. वामपंथी विचारधारा के अनुसार इस परम्परा की शुरुआत हिन्दुओं के सवर्ण समाज ने दलित समाज के साथ की थी जो किसी भी रूप में निराधार और असत्य थी और अब उस असत्य से पर्दा उठाने की कोशिश करते दिखाई दिए हैं वरिष्ठ संघ पदाधिकारी श्री कृष्ण गोपाल जी ..

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RSS के संयुक्त महासचिव कृष्ण गोपाल ने सोमवार को कहा कि भारत में छुआछूत की शुरुआत इस्लाम के आगमन के बाद हुई. उन्होंने जोर दिया कि आरएसएस एक जाति विहिन समाज का समर्थन करता है और ‘छुआछूत का पहला उदाहरण इस्लाम के आगमन के बाद देखने को मिला..  यह राजा दाहिर के घर में तब देखने को मिला जब उनकी रानियां जौहर करने के लिए जा रही थीं.  उन्होंने मलेच्छ शब्द का प्रयोग करते हुए कहा कि उन्हें जल्द जौहर करना चाहिए वरना ये मलेच्छ उन्हें छू लेंगे और वह अपवित्र हो जाएंगी।

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श्री कृष्ण गोपाल जी के अनुसार यह भारतीय पाठ में छुआछूत का पहला उदाहरण था।’लेकिन बाद में इसको अपने हिसाब से पारिभाषित करने वाले और उसी के आधार पर लाभ लेने वाले तमाम लोगों ने इसको विकृत कर डाला . कृष्ण गोपाल जी के इस बयान का सोशल मीडिया पर भारी समर्थन किया जा रहा है और ज्यादातर लोग ये मान रहे है कि राजा दाहिर के इस उदहारण को जान बूझ कर छिपाया गया था जिस से हिन्दू समाज को कुतर्को द्वारा बदनाम किया जा सकते.

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