वो कौन था वो भीमराव आम्बेडकर के विरोध के बाद भी अड़ गया था धारा 370 लागू करने के लिए ? जानिए इतिहास

5 अगस्त 2019 का दिन भारतीय इतिहास में उस समय स्वर्णिम अक्षरों में अंकित हो गया जब गृहमंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले आर्टिकल 370 को ख़त्म करने के के खिलाफ संकल्प पेश किया. इसके बाद पूरा देश जश्न मनाने लगा. देश की राष्ट्रवादी जनता लंबे समय से इस इन्तजार में थी कि वो दिन कब आएगा जब कश्मीर से धारा 370 हटेगी तथा जम्मू कश्मीर राज्य पूरी तरह से भारत का हिस्सा बन पायेगा. और ये दिन 5 अगस्त 2019 को आया.

ये तो हो गई धारा 370 ख़त्म करने की बात लेकिन यहां इतिहास की ये बात जानना भी जरूरी है कि आखिर वो कौन था जो आम्बेडकर जी के विरोध के बाद धारा 370 लागू करने के लिए अड़ गया था. दरअसल भारत के पहले कानून मंत्री बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर अनुच्‍छेद 370 के धुर विरोधी थे. उन्‍होंने इसका मसौदा तैयार करने से इनकार कर दिया था. आंबेडकर के मना करने के बाद शेख अब्‍दुल्‍ला नेहरू के पास पहुंचे और प्रधानमंत्री नेहरू के निर्देश पर गोपालस्‍वामी अयंगर ने मसौदा तैयार किया था.
शेख अब्‍दुल्‍ला को अनुच्‍छेद 370 पर लिखे पत्र में डॉ. भीमराव आंबेडकर ने कहा था कि आप चाहते हैं कि भारत जम्‍मू-कश्‍मीर की सीमा की रक्षा करे, यहां सड़कों का निर्माण करे, अनाज सप्‍लाई करे. साथ ही, कश्‍मीर को भारत के समान अधिकार मिले, लेकिन आप चाहते हैं कि कश्‍मीर में भारत को सीमित शक्तियां मिलें. आम्बेडकर ने शेख अब्दुल्ला से साफ़ कह दिया कि ऐसा प्रस्‍ताव भारत के साथ विश्‍वासघात होगा, जिसे कानून मंत्री होने के नाते मैं कतई स्‍वीकार नहीं करूंगा.
नेहरू ने पटेल को सूचित किए बिना ही शेख अब्‍दुल्‍ला के साथ अनुच्‍छेद 370 के मसौदे को अंतिम रूप दिया. संविधान सभा की चर्चा में मसौदे को पारित करवाने की जिम्‍मेदारी गोपालस्‍वामी अयंगर को मिली, लेकिन प्रस्‍ताव को सभा में मौजूद सदस्‍यों द्वारा फाड़ दिया गया. उस समय प्रधानमंत्री नेहरू अमेरिका में थे. सरदार और अब्‍दुल्‍ला के रिश्‍ते ठीक नहीं थे. ऐसे में अयंगर ने मदद के लिए वल्‍लभभाई पटेल की ओर रुख किया. उन्‍होंने पटेल से कहा कि यह मामला नेहरू के अहम से जुड़ा है, नेहरू ने शेख को उनके अनुसार ही फैसले लेने को कहा है. अंत में नेहरू की चली तथा 370 लागू हो गया.
जब ये कानून लागू किया गया तो इसका भारी विरोध किया गया तथा इसे भारत की संप्रभुता के लिए खतरा बताया गया. कश्मीर को लेकर स्थिति तब भारत के हाथ से निकल गई जब प्रधानमंत्री नेहरू कश्मीर मुद्दे को यूएन में ले गये. यह माउंटबेटन थे, जिन्‍होंने नेहरू को जम्‍मू-कश्‍मीर के मुद्दे को संयुक्‍त राष्‍ट्र में ले जाने के लिए राजी किया था.इसलिए तो पाकिस्‍तान बार-बार कहता है कि कश्‍मीर विवाद को भारत ही संयुक्‍त राष्‍ट्र लेकर गया था.
गौरतलब है कि गृह मंत्री शाह ने रास में कहा कि हम वही तरीका अपना रहे हैं जो 1952 व 1962 में कांग्रेस ने अपनाया था. तत्कालीन कांग्रेस सरकारों ने अधिसूचना के माध्यम से ही इस अनुच्छेद में संशोधन किए थे. सपा के प्रो. राम गोपाल यादव ने इस पर शाह से पूछा था कि क्या बगैर संविधान संशोधन विधेयक लाए संविधान में संशोधन हो सकता है? इस पर शाह ने उक्त स्पष्टीकरण दिया. सोमवार 5 अगस्त 2019 की तारीख में स्वतंत्र भारत का नया इतिहास लिख दिया गया. 17 अक्टूबर 1949 को संविधान में राष्ट्रपति के आदेश से जोड़े गये अनुच्छेद 370 को उसी तरीके से खत्म कर दिया गया.
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